धामी कैबिनेट में 7 मंत्रियों का ‘हाथ’ से नाता, मिशन 2027 पर नजर

7 Ministers in Dhami Cabinet Have Ties to the 'Hand'; Eyes Set on Mission 2027 7 Ministers in Dhami Cabinet Have Ties to the 'Hand'; Eyes Set on Mission 2027

उत्तराखंड। उत्तराखंड की राजनीति में आज एक अहम दिन रहा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए पांच नए चेहरों को शामिल किया. राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस फेरबदल की सबसे बड़ी खासियत ‘सोशल इंजीनियरिंग’ रही है. भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ठाकुर, ब्राह्मण, दलित और पंजाबी समाज के बीच एक सटीक संतुलन बनाने की कोशिश की है। इसके साथ ही धामी कैबिनेट अब पूर्ण रूप से 12 सदस्यों वाली हो गई है. इस विस्तार में सरकार की रणनीति साफ तौर पर सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रही. मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए चेहरों के जरिए अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।

जातीय दृष्टि से देखें तो 2 मंत्री ठाकुर समाज से (भरत चौधरी, राम सिंह कैड़ा), 1 दलित समाज से (खजान दास), 1 ब्राह्मण समाज से (मदन कौशिक) और 1 पंजाबी समाज से (प्रदीप बत्रा) से. वहीं क्षेत्रीय संतुलन से देखें तो 1 मंत्री कुमाऊं क्षेत्र से है जबकि 2 मंत्री गढ़वाल और 2 मंत्री मैदानी क्षेत्रों से शामिल किए गए हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता खजान दास दलित समाज से आते हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं. 2022 विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजपुर रोड सीट से 37,027 वोट हासिल कर कांग्रेस के राजकुमार को 11,163 मतों से हराया. इससे पहले 2017 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की थी. उनका राजनीतिक सफर 2007 में धनौल्टी से विधायक बनने के साथ शुरू हुआ था।

66 वर्षीय भरत चौधरी रुद्रप्रयाग से विधायक हैं और 2017 से लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं. ठाकुर समाज से आने वाले चौधरी की हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. क्षेत्रीय राजनीति में उनका मजबूत प्रभाव है. 2007 में शरद पवार की एनसीपी, 2012 में निर्दलीय चुनाव लड़े लेकिन दोनों में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद कांग्रेस में भी कुछ समय रहने के बाद पहली बार भाजपा जॉइन कर मोदी लहर में 2017 में जीत हासिल की.

जनवरी में भरत चौधरी अपने बयान से चर्चाओं में रहे. उन्होंने एक कार्यक्रम में कह डाला था की जो मेरी नहीं सुनेगा वो मेरे जूते की सुनेगा। छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत करने वाले राम सिंह कैड़ा ने पहले कांग्रेस में काम किया. 2017 में टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की. बाद में भाजपा के करीब आए और 2021 में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हो गए. 2022 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की।

प्रदीप बत्रा विधायक, रुड़की: पेशे से व्यवसायी प्रदीप बत्रा होटल, दुकानों और अन्य कारोबारी गतिविधियों से जुड़े हैं. वह रुड़की सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. 2012 में कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले बत्रा ने 2022 चुनाव से पहले भाजपा जॉइन की और लगातार तीसरी जीत हासिल की. क्षेत्र में मजबूत पकड़ के चलते उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।



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