नन्हे हाथी की छठी मनाई गई, ग्रामीणों ने नाम रखा ‘काशी’

कोरबा। जिले के करतला रेंज अंतर्गत काशीपानी जंगल में हाथियों के झुंड में नन्हे मेहमान के आगमन पर ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में खुशियां मनाईं। सात गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर नन्हे हाथी की छठी मनाई और प्यार से उसका नाम ‘काशी’ रखा। इस आयोजन में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भोजन प्रसादी के जरिए ग्रामीणों ने अपनी खुशी साझा की।

नन्हे हाथी की छठी का आयोजन कारीपानी मंदिर के नीचे स्थित गौठान, टिकरापारा में किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने नन्हे हाथी के आगमन को लेकर उत्साह जताया और पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन किया। इसके बाद भोजन प्रसादी बांटी गई। हाथी के बच्चे का नाम ‘काशी’ रखा जाना इस आयोजन का खास आकर्षण रहा।

हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील

कार्यक्रम के दौरान एसडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उन्हें किसी भी तरह परेशान नहीं करने की अपील की। उन्होंने बताया कि काशीपानी जंगल में हाथियों का झुंड मौजूद है। जिले में हाथियों के कारण 17 किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। वन विभाग की ओर से लोगों को हाथियों की गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई।

धिनारा गांव से शुरू हुई परंपरा

जानकारी के अनुसार, हाथियों की छठी मनाने की यह परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। अब नन्हे हाथी ‘काशी’ के स्वागत में सात गांवों के लोगों की भागीदारी ने इस परंपरा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। ग्रामीणों का यह आयोजन वन्यजीवों के प्रति स्नेह और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना को दर्शाता है। हालांकि, हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने और वन विभाग के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।

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