आर बालराजू की मौत की सच्चाई, 3 जून 2024 ACC जामूल मामले में संजय तिवारी बाइज्जत बरी

फोटो - संजय तिवारी

दुर्ग। भिलाई के जामूल ACC ADANI सीमेंट फ़ैक्ट्री में मैकेनिकल इंजीनियर डिप्टी मैनेजर CHP के HOD संजय तिवारी को पुलिस ने CPP के HOD आर. बालराजू की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, 255 दिन बाद कोर्ट ने जांच में पाया कि यह हत्या नहीं बल्कि एक हादसा था, दुर्घटना था.

संजय तिवारी 4 जून 2024 से 13 फरवरी 2025 यानी 255 दिन तक जेल में रहे. कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर पुलिस की जांच की गुणवत्ता और जल्दबाजी पर सवाल खड़े कर दिए है. क्योंकि पीएम रिपोर्ट आने से पहले ही बेकासुर संजय तिवारी को जेल भेज दिया था. इस केस में स्वीकृत सबूत कुछ भी नहीं पाया गया तथा पूरी जांच को विवादास्पद माना गया है.

मृतक – आर. बालराजू

डिजिटल साक्ष्य से साबित हुए निर्दोष

इस केस में कोर्ट ने सारे डिटिजल साक्ष्य मोबाइल का कॉल डिटेल्स , लोकेशन , पीएम रिपोर्ट , लैब रिपोर्ट, CCTV कैमरा को आधार मानते हुए फैसले को संजय तिवारी के पक्ष में सुनाया. इस पूरे मामले में पुलिस की जांच में यह साबित नहीं हो पाया कि यह हत्या थी. जिसके बाद संजय तिवारी को दोषमुक्त निर्दोष करार दिया.पीएम रिपोर्ट में आर बालराजू की मौत हार्ट अटैक से होना पाया गया.

आर बालराजू के मोबाइल का कॉल डिटेल्स चेक किया गया तब उस दिन सुबह 9.26 और 13 सेकंड तक फ़ोन में बात किया है और 9.30 बजे चक्कर खाकर गिर चूका था और 3 इलेक्ट्रिशियन वहां खड़ा है और वहीं तीनों गौरव शर्मा लोगों को खबर दे रहे है. सबसे बड़ी बात आर बालराजू के मोबाइल का वाइस रिकार्डिंग, लोकेशन सब खंगाला गया तो कुछ नहीं मिला.

और संजय तिवारी का जब कॉल डिटेल्स खंगाला गया तो वे घटना के दिन सुबह 9.27, 9.28, 9.29, 9.31, 9.38 बजे तक फ़ोन में बात कर रहा था, तथा मोबाइल का लोकेशन ACC राजीव नगर का बताया. और 9.47 बजे हरिचंद, संजय तिवारी और राहुल सुपरवाईजर एक साथ घटनास्थल पर पहुंचे तब संजय तिवारी का मोबाइल लोकेशन चेंज हुआ दिख रहा है, ACC cpp एंट्री गेट मतलब  

इससे साफ़ हो गया कि संजय तिवारी CHP में अपने विभाग में था. मेंटनेस रूम में था परि स्थिति जानी साक्षी हरिचंद्र वर्मा और स्टार साक्षी आशीष मिश्रा ने कोर्ट में अपने बयान में स्पष्ट किया कि संजय तिवारी मेंटनेस रूम में उपस्थित था. ,

कोर्ट ने माना हत्या होना नहीं कर सके साबित

कोर्ट में प्रतिपरीक्षण में विवेचक और तत्कालीन जामुल थाना प्रभारी केशन कोसले ने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 19 में यह स्वीकार किया कि FIR करने के पहले और सभी कर्मचारियो द्वारा यह बताया गया था कि मृतक आर बालराजू की मृत्यु चक्कर खाकर गिर जाने की वजह से हुई है. इस प्रकार प्रकरण के विवेचक को मृतक आर बालराजू की मृत्यु गिर जाने की वजह से दुर्घटना के स्वरूप की होने का साक्ष्य प्राप्त होना दर्शित है.

इस मामले में प्रति परीक्षण की कंडिका- 15 में पीएम करने वाले डॉक्टर ने यह स्वीकार किया है कि यदि कोई व्यक्ति ऊँचाई से खड़े और उबड़ खाबड घरातल पर गिरे तो जैसी चोंट मृतक को आई थी वहवह दुर्घटनापूर्ण आना संभावित है। मृत्यु का कारण सिर में चोंट लगने की वजह से , ज़्यादा खून का बहना और ह्दय घात हार्टअटैक से होना प्रतीत होता है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मृतक को जो अब्रेजन को चोंट आई थी वह गिरने की वजह से आ सकती है. 

एसीसी अडानी जामूल कंपनी ने और मृतक के परिजन दोनों तरफ से कोई FIR नहीं कराई थी और FIR में संजय का नाम नही था.

इस मामले में न तो ACC अडानी जामूल कंपनी ने एफआईआर दर्ज करवाई थी और न ही मृतक के परिजनों ने अपराध दर्ज करवाई थी। इस मामले में जामुल पुलिस ने ही हत्या का मामला दर्ज कर मुखबिर कि सूचना पर संजय तिवारी को गिरफ्तार किया था। मुखबीरी करने वाला प्लांट में काम करने वाला सिक्योरिटी विभाग का चतुर राव है और ये बात पुरे प्लांट के लोगों को पता है।

केवल शंका, संदेह के आधार पर बिना कोई सूचना के गिरफ्तार किया गया था कि उनके शर्ट पर खून का दाग है। जबकि जाँच में पाया गया कि ” पूरे बांह का शर्ट जो कि नारंगी एवम् सिल्वर कलर की थी जिसमें अडानी नाम प्रिंटेड था जिसमें किसी प्रकार का खून निशान नहीं पाये गये”.

संजय ने बताया कि ACC अडानी सीमेंट कंपनी जामूल ने मेरे साथ भेदभाव किया है। एकपक्षीय कार्यवाही किया है, मेरा पक्ष सुना ही नहीं जबकि मेरे पास सबूत है कॉल डिटेल, लोकेशन, न्यायालय द्वारा दिया गया सर्टिफाइड कॉपी , प्रमाण पत्र दोषयुक्त का आदि।

नौकरी के लिए न्यायालय मे केस

श्रम न्यायालय डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर रायपुर से तथा CCIT सेंट्रल गर्वनमेंट इंडस्ट्रीयल ट्रिब्यूनल कोर्ट जबलपुर से सेशन एवम् जिला कोर्ट दुर्ग में केस चल रहा है।

अब सोचिए घटना की सूचना हरिचंद्र verma ने दिया तब हरिचंद्र Verma, संजय तिवादी aur राहुल सुपरवाइजर तीनो घटनास्थल पर (लगभग CHP से 350 से 400 मीटर की दूरी par )9.47 baje pahuche तब तक आर बालराजू को अस्पताल ले गये थे। वहाँ पर 100-150 कर्मचारी लोग थे उस भीड़ में संजय को किसी ने नहीं बोला उसके बाद वहाँ से तीनों एक साथ वापस आए और अपने विभाग में 10-15 लोगों के साथ बैठकर बात कर रहा था संजय तिवारी तब भी किसी ने उँगली नहीं उठाया.

मात्र चतुर राव ने ही बोला था वो भी अकेले में CHP में नल के पास। तब संजय ने जवाब दिया कि मैं भी अभी वहीं से आया हूँ अपनी दुश्मनी का बदला चतुर राव ने ऐसा लिया. क्योकि कार्य के दौरान संजय तिवारी ने चतुर Rao को kade sabdo me bat kiya था aur उसने अपना बदला इस प्रकार लिया जबकि उसका आरोप बेबुनियाद निकला और उसी ने मुखबिरी किया था और जाँच में यह पाया गया ki ‘ पूरे बाँह का शर्ट jo नारंगी एवम् सिल्वर कलर की थी जिसमे अडानी नाम प्रिटेड था उसमें किमी भी प्रकार के खून के निशान नहीं पाया गया “.

3 जून 2024 ACC अडानी जामूल फ़ैक्ट्री का प्रकरण जिनमें संजय तिवारी नकल रोजनामचा में लिखा गया है कि संजय तिवारी को ACC कॉलोनी जामूल से मुखबिर की सूचना पर संदेही को गिरफ्तार किया गया जबकि सच ये है कि संजय तिवारी को उसके विभाग से पूछताछ के लिए लेकर गया था और नही छोड़ा.

छत्तीसगढ़ बातचीत को संजय तिवारी ने बताया सच्चाई

ये सवाल ही रह रह गया , जिसका जवाब नहीं मिल पाया?

1. मात्र 9:30 से 9:46 में 16 मिनट में कैसे एम्बुलेंस आई?

2. जबकि आर बालराजू जो कि मूर्छित अवस्था में था उसे कार में लेकर गये स्पर्श हॉस्पिटल भिलाई. 

3. कार की बात छुपाई क्यों गई? 4 प्रकरण का पहला गवाह गौरव शर्मा अपना बयान कोर्ट में क्यों बदला? क्यों संजय तिवारी को फंसाना चाहता था?

5. गौरव शर्मा थाना में अलग , कोर्ट में अलग बयान क्यों दिया ?

6.पावर प्लांट से गौरव शर्मा 3 इलेक्ट्रीशियन तेजु ढीमर , पंचू निषाद और योगेश चंद्राकर को 9:30 संजय तिवारी के विभाग में मोटर मेंटनेस के लिए भेजा रहा था ऐसा लिखा है परंतु संजय तिवारी का गौरव शर्मा के साथ कोई बातचीत नहीं हुई थी.

7. कौन सा मोटर में मेंटनेस के लिए भेज रहा था, जबकि CHP में किसी भी मोटर में प्रॉब्लम नहीं था?. अभी भी CHP के वर्कर से पूछ सकते है?

8. गौरव शर्मा ने कोर्ट में कहा घटनास्थल से पावर प्लांट की दूरी 800 मीटर है यह बात गलत है लगभग 250 मीटर है.

 9. एम्बुलेंस को सिक्योरिटी हेड सेफ्टी हेड, एचआर-हेड और मेडिकल हेड ने भेजा ऐसा कोर्ट में गौरव शर्मा में बोला जबकि एम्बूलेंस आई ही नहीं थी। ACC के डॉक्टर ने एम्बुलेंस में चढ़कर आर बालराजू का प्राथमिक उपचार किया. सबको कार के जगह एम्बुलेंस बोलने को किसने कहा था? मुख्य साजिश कर्ता अब तक बेनकाब?

10. 5 से 6 फीट गड्ढा करके JCB मशीन से घन , हथौड़ा निकलवाया पुलिस ने. कोई भी व्यक्ति 24 घंटे में 5 से 6 फ़ीट गड्ढा नहीं खोद सकता तो फिर संजय तिवारी 5 से 6 फ़ीट गड्ढा कब खोदा और कब पाट डाला जिसे JCB से खोदना पड़ा. और उस घन , हथोड़ा में हाथ के निशान या रक्त के निशान नहीं पाया गया.

11. संदिग्ध मोबाइल नंबर 95XXXXXX50 की जांच नहीं हुई क्योंकि आर बालराजू की दिन में और रात में ज्यादा बात होती थी ऐसी नंबर पर और 3 , 4 , 5 , 6 तारीख को भी फोन रात में दिन में आया है.

12. संजय तिवारी ने बताया कि 03 – 06 2024 दिन सोमवार को मेरे विभाग में CHP में किसी भी मोटर में कोई परेशानी टेक्निकल प्रॉब्लम नहीं था फिर क्यों लिखवाया चालान में गौरव शर्मा कि मैं 3 इलेक्ट्रिशियन को CHP मोटर मेंटनेस के लिए भेजा था 9.30 बजे? 

13. जनरल शिफ्ट में 8 से 5 का ड्यूटी होता है फिर 9 . 30 बजे ही 3 इलेक्ट्रिशियन को क्यों भेजा ? जबकि सभी कर्मचारी ,अधिकारी प्लांट में 8.45 तक अपना अपना कार्य में लग जाते है.

14. संजय तिवारी का कहना था कि मैं कंपनी के MD से मिलना चाहता हूँ, पर कोई जवाब नहीं दे रहा है. और कौन कौन प्लांट के लोगों ने क्या लिखकर दिया है मैं देखना चाहता हूँ , प्लांट चेक करें

कोर्ट ने माना कि इस केस में प्रस्तुत साक्ष्य की कोई भी कड़ी जुडी होना दर्शित नहीं है. जो कि घटना संजय द्वारा करने का निष्कर्ष स्थापित करती हो इसलिए संजय तिवारी को IPC 302 के आरोप से दोषमुक्त किया जाता है. आज संजय तिवारी को बाईज्जत बरी हुए लगभग साढ़े 13 महीना हो चूका है.

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