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जानें, आखिर क्यों भगवान जगन्नाथ ने हनुमान जी को स्वर्ण बेड़ियों से बांध दिया था

Bedi Hanuman Temple

आध्यात्मिक ख़बर। 2 अप्रैल को देशभर में हनुमान जयंती का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन हनुमान जी के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ इकट्ठा होगी. क्या आप जानते हैं कि ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के पास ही रामदूत हनुमान जी का भी एक मंदिर है, जिसे बेड़ी हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है।

ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर चार धाम में से एक माना जाता है. यह मंदिर विष्णु जी के अवतार भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है. भगवान यहां अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं. इस मंदिर के बारे में बहुत से लोग जानते होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहां जगन्नाथ मंदिर की रक्षा कौन करता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर की सेवा श्रीराम के परम भक्त और संकटों को हरने वाले संकटमोचन हनुमान करते हैं।

लोक मान्यता है कि मालवा के राजा इंद्रद्युम्न ने जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया था. कहते हैं कि भगवान विष्णु ने स्वयं दर्शन देकर उन्हें यह मंदिर बनवाने का आदेश दिया था, जिसकी रक्षा आज भी हनुमान जी करते हैं. कहते हैं कि यहां कण-कण में हनुमान वास करते हैं।

जगन्नाथ मंदिर के पास ही रामदूत हनुमान जी का भी एक मंदिर है, जिसे बेड़ी हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है. आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस मंदिर का नाम बेड़ी हनुमान मंदिर क्यों है. इसके पीछे एक लोक मान्यता छिपी है. ऐसा कहते हैं कि प्राचीन समय में समुद्र की तेज लहरों ने तीन बार जगन्नाथ मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी. तब महाप्रभु जगन्नाथ ने पवन पुत्र हनुमान को यहां पहरा देने और समुद्र की लहरों को नियंत्रित करने का निर्देश दिया था।

भगवान जगन्नाथ के आदेश पर हनुमान जी ने अपना दायित्व बहुत अच्छे से निभाया. हनुमान जी के वहां पहरा देने से समुद्र की तेज लहरें भी थम गईं. लेकिन जब भी हनुमान के कान में राम नाम के भजन पड़ते या उनके कीर्तन की आवाज उन्हें सुनाई देती, वो पहरेदारी छोड़ उस स्थान पर चले जाते।

ऐसे में समुद्र की लहरें मौका पाते ही फिर से विकराल रूप धारण कर मंदिर में प्रवेश कर लेतीं. यही वजह है कि भगवान जगन्नाथ ने हनुमान जी को वहां स्वर्ण बेड़ियों से बांध दिया. ताकि हनुमान हमेशा-हमेशा के लिए वहीं रहकर जगन्नाथ मंदिर की रक्षा कर सकें। मान्यता है कि हनुमान जी भगवान जगन्नाथ के उस आदेश का आज तक पालन कर रहे हैं. वो आज भी पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सामने रहकर मंदिर की रक्षा कर रहे हैं।



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