रायपुर। संत श्री आसारामजी आश्रम, रायपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव हर्षोल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर आश्रम परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया तथा भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मनमोहक झाँकी एवं विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।







भगवान श्रीकृष्ण के पूजन-अर्चन, भजन-कीर्तन एवं आरती के दौरान पूरा आश्रम परिसर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ तथा ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूँज उठा।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बाल संस्कार केंद्र के बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने श्रीकृष्ण, राधा एवं ग्वाल-बाल की वेशभूषा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं तथा भारतीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। बच्चों की प्रस्तुतियों को उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ खूब सराहा।जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को श्रद्धापूर्वक 56 भोग अर्पित किया गया।
विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों एवं मिष्ठानों से सजी भोग की थाली आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में भोग अर्पित कर सर्वकल्याण एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।महोत्सव में आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम ने भी सभी में उत्साह भर दिया। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से प्रेरित इस आयोजन में बच्चों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मटकी फूटते ही पूरा परिसर जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूँज उठा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को वर्तमान जीवन के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
बाल संस्कार केंद्र जैसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों में सदाचार, अनुशासन, सेवा, संस्कार एवं भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है।कार्यक्रम के अंत में भगवान श्रीकृष्ण की आरती की गई तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। जन्माष्टमी महोत्सव में बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठजनों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, भक्ति, संस्कृति एवं संस्कारों का सुंदर संगम बनकर यादगार रहा।