एक के बाद एक देशों के बीच अचानक युद्ध छिड़ जा रही है, युद्ध से नुकसान सिर्फ आम लोगों की होती है, दुर्त जीवन जीना पड़ता है, देशों के बीच जारी युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को युद्ध रुकवाने वाला महान नेता बनाते लग जाते है, अपनी तानाशाही को अलग अलग तरीकों से दुनियाभर में पेश करते रहते है, जो बिलकुल सही नहीं है।
ट्रंप को अन्य देशों पर नियंत्रण रखने का अधिकार नहीं है, अचानक सोशल मीडिया में पोस्ट कर देशों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर देते है। मानों उन देशों के प्रशासक पर ट्रंप के नियंत्रण में है।
खुद को बाप क्यों बताने लगते है डोनाल्ड ट्रंप
दरअसल अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से वाशिंगटन की विदेश नीति लगातार आक्रामक नजर आई है। दूसरे कार्यकाल की शुरूआत से ही ट्रंप कनाडा, पनामा, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड, ईरान, क्यूबा जैसे देशों को धमकी देते हुए नजर आए हैं। धमकी से आगे बढ़ते हुए 3 जनवरी को ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में एक अभियान को अंजाम देते हुए वहां के राष्ट्रपति मादुरो को उठा लिया, इसके तुरंत बाद ही वेनेजुएला की सत्ता में जो नेता आए वह ट्रंप का समर्थन करने लगे। ट्रंप को अपनी सेना के इस अभियान पर काफी गर्व है, लेकिन इसी गर्व के चलते ट्रंप ईरान को भी वेनेजुएला समझ बैठे। मादुरो को पकड़ने के लगभग 2 महीने बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमला किया और खामेनेई को मार डाला, लेकिन वेनेजुएला की तरह ट्रंप को ईरान में सत्ता पर कोई अप्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं मिला।
वेनेजुएला में अपने अभियान से उत्साहित ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि वेनेजुएला में अमेरिका ने जो किया वह एक अच्छा उदाहरण है, जिसे तेहरान में भी अपनाया जा सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि अमेरिका को ईरान की सरकार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति में शामिल होना होगा, जैसा कि हाल ही में उन्होंने वेनेजुएला में डेल्सी (वेनेजुएला की नई नेता) वाले मामले में किया।ट्रंप भले ही वेनेजुएला वाला ऐक्शन ईरान में भी दिखाना चाहते हों, लेकिन ईरान और वेनेजुएला में काफी अंतर है। यही कारण है कि वेनेजुएला में ट्रंप ने कुछ घंटों के अंदर सत्ता परिवर्तन करके अप्रत्यक्ष रूप से कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया, तो वहीं ईरान के साथ वह एक संभावित लंबे युद्ध में फंस गए हैं।
दोनों देशों की अर्थव्यवस्था भले ही तेल के निर्यात पर केंद्रित हो, लेकिन इसके बाद भी दोनों देशों में काफी अंतर है। वेनेजुएला का क्षेत्रफल लगभग 3,40,000 वर्ग मील है और उसकी आबादी लगभग 2.8 करोड़ है, जबकि ईरान लगभग 6,26,000 वर्ग मील क्षेत्र में फैला है। लगभग दोगुना और उसकी आबादी 9.1 करोड़ है, जो वेनेजुएला से तीन गुना से भी ज्यादा है। दूसरे शब्दों में, ईरान कोई छोटा और संघर्षरत देश नहीं है। यह एक बड़ा, जनसंख्या वाला राष्ट्र है, जिसकी अर्थव्यवस्था प्रतिबंधों के बावजूद चल रही है और जिसके पीछे लगभग 50 वर्षों का क्रांतिकारी इतिहास है।