पानी में पत्थर को तैराते है…विज्ञान भी फेल है इस गांव की कला के पीछे  

राजस्थान। समंदर का नीला पानी और प्रकृति की हरियाली मन को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है। लोग घूमने के लिए ज्यादातर ऐसी ही जगह का चुनाव करते हैं। वहीं, अगर आप मन को रोमांचित करने वाली जगहों की तलाश कर रहे हैं, तो हम आपके लिए ऐसे जादुई नगरी की जानकारी लेकर आए हैं, जहां जाकर आपका सिर चकरा जाएगा। राजस्थान की धरती पर ऐसा गांव है, जहां की कला के आगे विज्ञान भी फेल है। हम बात कर रहे हैं बड़ोदिया गांव की।

राजस्थान के बूंदी जिले से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसा बड़ोदिया गांव अपने आप में खास है और कला व आस्था दोनों का अनोखा संगम देखने को मिल जाता है। क्या आपने मटके के ऊपर ट्रक, कागज के नोट के ऊपर गाड़ी, गर्दन को शरीर से अलग और डंडे पर बिना सहारे के खड़ी उलटी बाइक को देखा है? यह सब सुनने में भी अविश्वसनीय लगता है लेकिन बड़ोदिया गांव के लोगों को बैलेंस और जादू की कला विरासत में मिली है और वे बड़ी और भारी चीजों को अंगूठे की साइज की चीजों पर टिकाने का दम रखते हैं।

बड़ोदिया गांव के लोग जादू और करतब दिखाने में माहिर हैं। वे जादू और करतब के लिए किसी तरह की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि पारंपरिक विद्या से पानी पर भी पत्थर को तैरा देते हैं। हालांकि यह नजारा साल में दो बार ही देखने को मिलता है। दीपावली के बाद भैयादूज के दिन बूंदी के इस गांव में दो दिवसीय मेला लगता है, जिसका आनंद लेने के लिए विदेश से भी लोग आते हैं। इस मेले में सिर्फ जादू ही नहीं, आस्था का भी रूप देखने को मिलता है। भाईदूज के दिन बड़ोदिया गांव में घासभैरूजी की सवारी निकलती है, जो बाबा भैरू के ससुराल से मायका लौटने की एक रस्म के तौर पर देखा जाता है। गांव के सभी लोग घासभैरूजी की सवारी तैयार करते हैं और पूरे गांव में यात्रा निकलती है। अगर आप भी दो दिन के लिए कहीं जाने का प्लॉन कर रहे हैं, तो बड़ोदिया गांव जाना बेहतरीन ऑप्शन रहेगा। बड़ोदिया गांव के पास कुछ किलोमीटर की दूरी पर कई पुराने महल भी देखने को मिल जाते हैं। 10-20 किलोमीटर के दायरे में पर्यटक बाघ महल, केशोरायपाटन मंदिर, इंदरगढ़ और बीजासन माता मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं।

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