छत्तीसगढ़ में साय सरकार का सुशासन मॉडल, ग्राउंड से ग्रोथ तक

The Sai government's good governance model in Chhattisgarh: From grassroots to growth. The Sai government's good governance model in Chhattisgarh: From grassroots to growth.

रायपुर/छत्तीसगढ़। प्रदेश आज ग्रामीण विकास के उस मुकाम पर खड़ा है, जहाँ नीतियाँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ज़मीन पर ठोस बदलाव का माध्यम बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन को केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि कार्यशैली के रूप में अपनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी नरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास का एक उभरता मॉडल बना दिया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में 8 लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण होना, देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि आवास केवल छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और आत्मसम्मान का आधार है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने आवास योजना को आजीविका से जोड़ा है। आवास हितग्राहियों को सेंटरिंग प्लेट एवं अन्य निर्माण की आपूर्ति कर 8 हजार से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन सकीं।

छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी चुनौती रहे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास को समान महत्व दिया है। कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। आर-सेटी एवं प्रोजेक्ट उन्नति के जरिए आत्मसमर्पित नक्सलियों सहित 5 हजार से अधिक हितग्राहियों को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, 3416 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को आवास की स्वीकृति दी गई है। पीएम-जनमन आवास योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 33 हजार से अधिक आवासों की स्वीकृति इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।

साय सरकार ने योजनाओं की निगरानी में आम नागरिक को सहभागी बनाकर पारदर्शिता को नई परिभाषा दी है। टोल-फ्री हेल्पलाइन, पंचायत स्तर पर क्यूआर कोड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त कर सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को मनरेगा, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्यघर जैसी योजनाओं से अभिसरण के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे समग्र लाभ सुनिश्चित हो रहा है।

‘मोर गांव मोर पानी’ महाभियान छत्तीसगढ़ की जल संरक्षण नीति का प्रतीक बनकर उभरा है। नरेगा के तहत दो वर्षों में 20 करोड़ से अधिक मानव दिवसों का सृजन हुआ है। जल संरक्षण के लिए 35 हजार से अधिक कार्य और 10 हजार से अधिक आजीविका डबरियों की स्वीकृति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से जीआईएस आधारित योजना निर्माण में छत्तीसगढ़ ने देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बनाया है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.82 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से लगभग 30 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं। ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से अब तक 4.94 लाख महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। महिलाओं की आवाज़ को मंच देने के लिए ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम और उनके उत्पादों के विपणन हेतु ‘छत्तीसकला’ ब्रांड राज्य सरकार के नवाचारों के प्रमाण हैं।

प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 2902 किलोमीटर सड़कों की स्वीकृति और 1064 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण होना, दूरस्थ और जनजातीय अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत सड़कों के निर्माण में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों से अधूरी पड़ी 43 सड़कों को पूरा कर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि विकास अब किसी क्षेत्र या वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि शासन का वास्तविक उद्देश्य आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। आवास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और अधोसंरचना के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पारदर्शी, नवाचारी और जनोन्मुखी कार्यप्रणाली के कारण छत्तीसगढ़ अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।

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