सहारनपुर। नकली सिक्के बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, यहां मशीनों के जरिए रोजाना हजारों 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए जा रहे थे। कार्रवाई में मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से 6,400 तैयार नकली सिक्के और करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के बरामद किए हैं।
पुलिस जांच में इस नेटवर्क से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि गिरोह अब तक 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में खपा चुका था। सहारनपुर में जिस फैक्ट्री का खुलासा हुआ, वहां छह मशीनों की मदद से प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार किए जा रहे थे।
10वीं फेल लूथरा ने ऐसे बदला अपना कारोबार
पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना उपकार लूथरा 10वीं कक्षा तक पढ़ा है। दिल्ली के उत्तम नगर में ज्वैलरी शॉप में चोरी के बाद उसने अपना काम बदलने की कोशिश की और कपड़ों की दुकान शुरू की, लेकिन कारोबार नहीं चला।इसके बाद देहरादून में उसकी मुलाकात गुलशन गंभीर से हुई। इसी मुलाकात के बाद उसकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। पुलिस के मुताबिक, गुलशन गंभीर से उसने नकली सिक्के बनाने का तरीका सीखा और धीरे-धीरे इस अवैध कारोबार में बड़ा नाम बन गया।
1990 से शुरू हुआ सफर, फैक्ट्रियों का फैलाया नेटवर्क
पूछताछ और पुरानी पुलिस जांच के मुताबिक, लूथरा का नकली सिक्कों से जुड़ा सफर करीब तीन दशक पुराना है। वर्ष 1997 में गुलशन गंभीर के संपर्क में आने के बाद उसने नकली सिक्के बनाने का काम सीखा। वर्ष 1999 में कनॉट प्लेस पुलिस ने भी उसे इसी तरह के मामले में गिरफ्तार किया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना नेटवर्क और मजबूत किया। पुलिस जांच में दिल्ली के अलावा हरियाणा और राजस्थान तक नकली सिक्के बनाने के ठिकानों की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए उसके नेपाल जाने की बात भी सामने आई।
2017 में एक लाख रुपये का था इनाम
साल 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उपकार लूथरा को हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने उसके कब्जे से पांच रुपये के करीब 8,500 नकली सिक्के बरामद किए थे।इसके बावजूद जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया और अब सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री संचालित कर रहा था।
5-6 रुपये में तैयार होता था 20 रुपये का नकली सिक्का
पुलिस के अनुसार, गिरोह के लिए नकली सिक्के बनाना बेहद फायदे का कारोबार था। एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब 5 से 6 रुपये खर्च होते थे। इसके बाद 20 रुपये का नकली सिक्का एजेंटों को करीब 12 से 15 रुपये में दिया जाता था।एजेंट आगे कमीशन के आधार पर इन सिक्कों को अलग-अलग दुकानों और प्रतिष्ठानों में खपाते थे। इस तरह नकली सिक्के सीधे फैक्ट्री से बाजार में न जाकर एक संगठित नेटवर्क के जरिए पहुंचाए जाते थे।
शराब ठेके और टोल प्लाजा थे निशाने पर
गिरोह ने नकली सिक्कों को बाजार में चलाने के लिए ऐसे स्थानों को चुना, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में नकदी का लेनदेन होता है। पूछताछ में शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों पर नकली सिक्के खपाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, शराब के ठेके गिरोह की प्राथमिकता में थे, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में छोटे मूल्य के लेनदेन होते हैं।
6 मशीनें, रोज 12 हजार तक नकली सिक्के
सहारनपुर में मिली फैक्ट्री में छह मशीनें लगी थीं। पुलिस का दावा है कि इन मशीनों से रोजाना 10 से 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए जाते थे। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में तैयार और अधबने सिक्के मिलने के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सहारनपुर की फैक्ट्री से नकली सिक्कों की सप्लाई किन-किन राज्यों और शहरों तक की जा रही थी और इस नेटवर्क में कितने एजेंट जुड़े हुए हैं।