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साइबर ठगी के पीड़ितों को जल्द मिलेगी राहत, ठगी की रकम वापस कराने GRM-MRM पोर्टल की ट्रेनिंग

दुर्ग। साइबर अपराधों के मामलों में पीड़ितों की ठगी गई राशि को समय रहते सुरक्षित कराने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस दिलाने के उद्देश्य से दुर्ग में रेंज स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। दधीचि सभागार, पुलिस लाइन दुर्ग में आयोजित इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों, साइबर कमांडो और बैंक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल की उपस्थिति रही। मुख्य वक्ता के रूप में सहायक पुलिस महानिरीक्षक कवि गुप्ता ने GRM (Grievance Redressal Mechanism) पोर्टल और MRM (Money Restoration Module) के प्रभावी संचालन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान के बीच त्वरित समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही ठगी की राशि पर तत्काल होल्ड और लियन लगाने तथा आवश्यक न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से पीड़ित को राशि वापस कराने से जुड़ी कार्यवाही पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।

दुर्ग, बेमेतरा और बालोद के प्रतिभागी हुए शामिल

कार्यशाला में दुर्ग, बेमेतरा और बालोद जिले के 45 बैंक मैनेजर तथा थानों में पदस्थ 50 से अधिक साइबर कमांडो शामिल हुए। इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) शोभराज अग्रवाल, नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग हर्षित मेहर, उप पुलिस अधीक्षक (रेंज साइबर थाना) अनूप लकड़ा और उप पुलिस अधीक्षक (ACCU) यदुमणि सिदार सहित संबंधित पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

समय पर शिकायत करने से बढ़ती है रकम सुरक्षित होने की संभावना

प्रशिक्षण का उद्देश्य साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद वित्तीय कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी होने पर जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, उतनी ही जल्दी संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थानों के साथ कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी होने की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और अपने बैंक को भी सूचना दें। इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण साझा नहीं करने की अपील की गई है।

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