रायगढ़ कोर्ट ने गैंगरेप केस में सुनाई कड़ी सजा, दो को आजीवन कारावास और चार आरोपियों को 20-20 साल की पड़ी सजा

रायगढ। रायगढ़ जिले में साल 2024 में हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी एक्ट) ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास और चार आरोपियों को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़िता को क्षतिपूर्ति योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि देने की अनुशंसा की गई है।

रायगढ़ पुलिस के अनुसार, यह फैसला 28 सितंबर 2026 को सुनाया गया। पुलिस की विवेचना और विशेष लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी के बाद सभी छह आरोपियों को दोषसिद्ध किया गया।

न्यायालय ने आरोपी सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास से दंडित किया है। वहीं, आरोपी कृष्णा उर्फ राहुल चौहान, नरेंद्र उर्फ छोटू सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को सामूहिक दुष्कर्म की धारा 70(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 190 के तहत 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है।

पुलिस के अनुसार, घटना 19 अगस्त 2024 की शाम पुसौर थाना क्षेत्र में हुई थी। पीड़िता अकेले पैदल मेला देखने जा रही थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर उसकी मुलाकात पूर्व परिचित आरोपी कृष्णा उर्फ राहुल चौहान से हुई, जो अपने साथियों के साथ था। अभियोजन के अनुसार, आरोपी पीड़िता को जबरन तालाब की ओर ले गए, जहां अन्य युवक भी पहुंच गए। वहां सभी आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया।

घटना के बाद आरोपियों ने पीड़िता को धमकाया और अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। हालांकि, पीड़िता किसी तरह वहां से निकलकर गांव की महिलाओं के पास पहुंची और उन्हें घटना की जानकारी दी। इसके बाद सरपंच को सूचना दी गई और 20 अगस्त 2024 को थाना पुसौर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

मामले में अपराध क्रमांक 194/2024 के तहत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी। पुलिस ने जांच के दौरान कुल नौ आरोपियों की पहचान की। इनमें से आठ को पकड़ा गया, जबकि दो विधि से संघर्षरत बालक पाए गए। एक अन्य विधि से संघर्षरत बालक की मृत्यु हो जाने के कारण उसे प्रकरण से पृथक किया गया।

दो विधि से संघर्षरत बालकों के विरुद्ध किशोर न्यायालय में अलग से चालान प्रस्तुत किया गया। प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी पुसौर निरीक्षक रोहित बंजारे ने की थी। बाद में तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक आकाश शुक्ला ने विवेचना की। जांच के दौरान दो आरोपियों के विरुद्ध एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।

रायगढ़ पुलिस के अनुसार, वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में मामले के सभी साक्षियों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई। तत्कालीन सीएसपी आकाश शुक्ला की विवेचना और विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल की पैरवी से अभियोजन को मजबूती मिली। न्यायालय ने सभी छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। साथ ही पीड़िता को क्षतिपूर्ति योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है।

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