रायपुर। राजधानी रायपुर में प्रतिबंधित नशीली टेबलेट की अवैध बिक्री के मामले में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और थाना गंज पुलिस की संयुक्त टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 209 नग प्रतिबंधित नशीली टेबलेट निट्राजेपम (नाइट्रोसन-10), घटना में प्रयुक्त स्कूटी और एक मोबाइल फोन सहित कुल लगभग 1 लाख 43 हजार 600 रुपये का मशरूका जब्त किया है। मामले में पुलिस अब नशीली टेबलेट की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है।
तेलघानी नाका ओवरब्रिज के नीचे ग्राहक की तलाश में था आरोपी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि गंज क्षेत्र के तेलघानी नाका ओवरब्रिज के नीचे एक व्यक्ति दोपहिया वाहन में प्रतिबंधित नशीली टेबलेट लेकर बिक्री के लिए ग्राहक तलाश रहा है। सूचना मिलते ही एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और थाना गंज पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर संदिग्ध को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपी की पहचान रोहित धरमवानी (27 वर्ष), निवासी पार्वती नगर, मुर्राभट्ठी, थाना गुढ़ियारी, रायपुर के रूप में हुई। वाहन की डिक्की की तलाशी लेने पर पुलिस को प्रतिबंधित नशीली टेबलेट निट्राजेपम (नाइट्रोसन-10) मिली। टेबलेट रखने और बिक्री करने के संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की।
पूछताछ में दूसरे आरोपी का नाम आया सामने
पुलिस के मुताबिक, रोहित धरमवानी ने पूछताछ के दौरान टेबलेट फाफाडीह, गंज निवासी करण यादव (28 वर्ष) से प्राप्त करना बताया। इसके बाद पुलिस टीम ने करण यादव की पतासाजी कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपियों के कब्जे से कुल 209 नग प्रतिबंधित नशीली टेबलेट, स्कूटी क्रमांक CG 04 RC 5848 और एक मोबाइल फोन जब्त किया गया। जब्त मशरूका की कुल कीमत लगभग 1,43,600 रुपये बताई गई है। पुलिस ने थाना गंज में अपराध क्रमांक 313/26 के तहत नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (NDPS) अधिनियम की धारा 22(ख) के अंतर्गत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की है।
सप्लाई नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित नशीली टेबलेट आरोपियों तक कहां से पहुंची और इसकी अवैध बिक्री में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। टेबलेट की उपलब्धता, परिवहन और बिक्री से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही, सप्लाई नेटवर्क के आगे और पीछे जुड़े लोगों की पहचान कर उनकी भूमिका का पता लगाया जा रहा है।