राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुरिया दरबार में शामिल होने पर सीएम साय ने बताया गौरवपूर्ण क्षण

रायपुर। विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा ‘मुरिया दरबार’ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय अस्मिता और सामूहिक निर्णय की परंपरा का जीवंत प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुरिया दरबार को बस्तर की गौरवशाली लोकपरंपरा बताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक आदिम जनसंसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण क्षण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुरिया दरबार बस्तर की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जहां लोकमत, जनआकांक्षाओं और सामुदायिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। यह परंपरा सदियों से जनभागीदारी, सामूहिक विचार-विमर्श और सामाजिक समरसता की भावना को सहेजती आ रही है।

उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और लोकजीवन से गहराई से जुड़ा उत्सव है। मुरिया दरबार इस विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने के साथ ही जनजातीय समाज की परंपराओं और सामूहिक निर्णय की भावना को भी अभिव्यक्त करता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और जनजातीय गौरव के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने मुरिया दरबार की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।

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