एमपी। उज्जैन में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां होटल के ओवरग्राउंड चैंबर की सफाई करने उतरे चार मजदूरों की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चैंबर के अंदर मौजूद गैस के असर से चारों मजदूर बेहोश हो गए थे। बाद में उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, चारों मजदूर होटल के चैंबर की सफाई करने के लिए अंदर उतरे थे। सफाई के दौरान वे कथित तौर पर चैंबर में मौजूद गैस के संपर्क में आ गए और बेहोश हो गए। इस हादसे में चारों की जान चली गई। हालांकि, चैंबर में कौन-सी गैस मौजूद थी और उसकी वजह से मजदूरों की मौत कैसे हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि मृतकों में से तीन की पहचान हो चुकी है, जबकि चौथे मजदूर की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल हादसे की परिस्थितियों और चैंबर में मौजूद गैस के संभावित प्रभाव को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।
इस हादसे ने बंद और कम हवादार जगहों में सफाई के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चैंबर, टैंक और सीवर जैसी जगहों में जहरीली गैसों या ऑक्सीजन की कमी का खतरा हो सकता है। ऐसे स्थानों पर बिना जांच और पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के प्रवेश करना जानलेवा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बंद जगह में प्रवेश करने से पहले गैस की जांच, पर्याप्त वेंटिलेशन, उचित सुरक्षा उपकरण और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित निगरानी दल की व्यवस्था जरूरी होती है। किसी व्यक्ति के अंदर बेहोश होने पर बिना सुरक्षा इंतजाम के उसे बचाने के लिए अंदर उतरना भी अन्य लोगों की जान जोखिम में डाल सकता है।
फिलहाल उज्जैन में हुए इस हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यह भी पता लगाया जाना बाकी है कि मजदूरों को चैंबर में उतारने से पहले सुरक्षा जांच की गई थी या नहीं और उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। चार मजदूरों की मौत ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा नियमों के पालन की जरूरत को एक बार फिर उजागर किया है।