कबीरधाम (Kabirdham)। अपाहिज (दिव्यांग) होना किसान के लिए अभिशाप बन गया है। बिरकोना बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा प्रबंधन द्वारा उनके साथ क्रूरता किया जा रहा है। किसान ने जिले के कलेक्टर से शिकायत की है। साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर, बैंकिंग लोकपाल रायपुर और केन्द्रीय वित्तमंत्री भारत सरकार को भी पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है। Birkona Bank Of Baroda
(Kisan Credit Card) खपरी निवासी किसान नन्दकुमार चन्द्रवंशी (61 साल Farmer Nandkumar Chandravanshi) और उनके बेटे निरज चन्द्रवंशी 30 साल 72 प्रतिशत शारीरिक रूप से दिव्यांग है। दोनों केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) बनवाने के लिये 2 मार्च 2026 को बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा बिरकोना गए थे, शाखा प्रबंधक ममता डे से मिले और केसीसी के लिये अनुरोध किया। जिस पर शाखा प्रबंधक ने कहा कि आप जितनी जल्दी दस्तावेज और फार्मेल्टी जमा क्र्रेंगे। उतना जल्दी आपको एक लाख अस्सी हजार स्वीकृत कर दूंगी। जिसके बाद किसान ने सभी दस्तावेज अप्रैल के पहले हफ्ते ही पूर्ण कर लिए। जब किसान प्रबंधक के पास दस्तावेज लेकर पहुंचे तो कल आना परसो आना अभी अडिट चल रहा है, अभी क्लोजिंग माह है बोलकर 20 बार से ज्यादा बैंक बुलाया। Kabirdham News

अब शाखा प्रबंधक ममता डे का कहना है कि बैंक ऑफ बड़ौदा 60 साल से ऊपर कोई भी व्यक्ति और दिव्यांग व्यक्ति के लिये केसीसी नहीं बनाती है। किसान ने बताया कि दस्तावेज जुटाने में अब तक 8 हजार 200 रुपए खर्च हो चुके है। आगे किसान ने आरोप लगाया है कि अगर उनके बैंक में केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) बनाना ही नहीं था। तो पहले ही दिन मना कर देती 2 माह झूठ बोलकर क्यों बैंक का चक्कर लगवाता रही। और बैंक के चक्कर लगाते लगाते 8 हजार 200 रुपए खर्च हो गए। 60 वर्ष उम्र में भीषण गर्मी में 20 चक्कर लगवाये है। अब खरीफ फसल की बुआई का समय आने वाला है। बैंक से कर्ज नहीं मिलने पर साहूकार से कर्ज लेना पड़ेगा। शाखा प्रबंधक ममता डे की क्रूरता से परेशान किसान नन्दकुमार चन्द्रवंशी ने कार्रवाई की मांग की है। Kisan Credit Card
