कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा नीट पेपर लीक के विरोध में 25 जून से प्रारम्भ हुआ आन्दोलन सरकार द्वारा तीन माँगों की स्वीकृति देने के बाद 25 जुलाई को समाप्त हो गया। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का त्याग पत्र, मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजा, आन्दोलन में हिंसा के बाद दर्ज किए गए एफआईआर की वापसी की माँग सरकार ने स्वीकार कर ली। शिक्षा व्यवस्था एवं परीक्षा में व्यापक सुधार के लिए संसद में बहस भी प्रस्तावित है। प्रसिद्ध तकनीकी विशेषज्ञ नन्दन नीलेकणि की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की समिति भी बन गयी है।
PM मोदी ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए इसे छात्रों के भविष्य के प्रति “घोर पाप” घोषित किया था। प्राथमिकता के तौर पर पेपर लीक के कारण रद्द हुई नीट परीक्षा को शीघ्र कराने का संकल्प दोहराया एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा कठोर श्रम कर व्यवस्था निर्माण करते हुए 21 जून को परीक्षा कराकर 16 जुलाई को नीट परिणाम घोषित किया। परीक्षा के लिए 22,79,743 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया जिनमें से 19,99,895 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें से 11,21, 185 उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए जिनमें 6,54,049 छात्राएं एवं 4,67,134 छात्र हैं। परीक्षा को सफल बनाने एवं पुनः गड़बड़ी न हो इसकी व्यवस्था करते हुए पेपर पहुँचाने की व्यवस्था में वायुसेना के विमानों एवं MI-17 हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया गया जिन्होंने लगभग 200 छोटी उड़ानें भरी। वायुसेना के एयरबेस से लेकर स्ट्रांग रूम तक चेन ऑफ कस्टडी का निर्माण किया गया। छात्रों को परीक्षा शुल्क से राहत देते हुए सम्बन्धित संस्थानों से आर्थिक व्यवस्था की गयी। युवा पीढ़ी के भविष्य को मद्देनजर 38 दिनों में यह चुनौतीपूर्ण कार्य संपन्न किया गया |
केवल तात्कालिक ही नहीं, स्थायी रूप से परीक्षा व्यवस्था में सुधार होना आवश्यक है, इसे समझते हुए मोदी सरकार ने भी प्रयास किए। नीट परीक्षा के आयोजन के लिए 2017 में निर्मित एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) जो 2018 से विधिवत कार्य कर रहा है, उसमें कार्यरत 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया। भविष्य की परीक्षा कम्प्यूटर आधारित हो इसकी व्यवस्था की जा रही है। पेपर लीक से संबंधित पुराने कानून में संशोधन कर दोषियों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये जुर्माना और 10 साल की जेल का प्रावधान किया जा रहा है। संशोधित कानून में माफिया की संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। आरोपियों को सजा जल्दी मिले, इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी की गयी है। परीक्षा में लापरवाही करने वाली एजेंसी एवं संस्थान से ही परीक्षा का पूर्ण खर्च लेने की व्यवस्था भी की गयी। इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ० के० राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी का गठन भी किया गया।
देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की गंभीरता सराहनीय है। हमारे विश्वविद्यालयों का स्तर वैश्विक स्तर का हो, विश्व के प्रसिद्द विश्वविद्यालय भारत में आएं, व्यवसायिक शिक्षा संस्थानों की संख्या में वृद्धि, जनजाति क्षेत्रों की शिक्षा, शिक्षा संस्कार एवं भारतीय स्वाभिमान निर्मित करने वाली बने एवं व्यवसाय से जुड़े, इन सभी क्षेत्रों में सराहनीय पहल हुई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना साहस पूर्ण कदम है। 2014 की तुलना में देशभर में विश्वविद्यालयों की संख्या 723 से बढ़कर 1338 और महाविद्यालयों की संख्या 36,634 से बढ़कर 52,081 हो गई है। उच्च शिक्षा में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थी 3 करोड़ से बढ़कर 4.5 करोड़ हुए हैं। तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत आईआईटी की संख्या 16 से 23 और एम्स की संख्या आठ से बढ़कर 23 हो गई है। इनके अलावा मेडिकल, जनजाति आदि सभी क्षेत्रों में शिक्षा सुधार की सराहनीय पहल हुई है। भारत के 52 संस्थान क्यू 5 वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल हुए हैं, जबकि भारत दुनिया का 5वां हायर एजुकेशन सिस्टम बनकर उभरा है। विश्व के प्रसिद्ध 15 विश्वविद्यालय भारत में अपने कैम्पस प्रारम्भ कर रहे हैं। वैश्विक स्तर का उच्च शैक्षणिक वातावरण देश के युवाओं को प्राप्त हो, यह मोदी सरकार की पहल का ही परिणाम है।
नीट सहित अन्य परीक्षाओं में लीक को आधार बनाकर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा चलने वाला आन्दोलन हाल के दिनों में ज्यादा चर्चा में रहा है। छात्रों की चिंताओं को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गंभीरता से लिया है एवं अनेक सोशल मीडिया साधनों के माध्यमो से अपना जुड़ाव एवं अपनी भावनाओं को प्रकट भी किया है।| केन्द्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा एवं डॉ० जीतेन्द्र सिंह द्वारा अनशनरत श्री सोनम वांगचुक एवं सीजेपी आन्दोलनकारियों से सकारात्मक वार्ता केंद्र सरकार की गंभीरता को ही प्रकट करती है। इसी सकारात्मक पहल का परिणाम है कि श्री सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को समाप्त कर समस्या के समाधान में सकारात्मक सहयोग किया।
जंतर-मंतर पर आयोजित इस आन्दोलन के स्वभाव, प्रकृति एवं नारों को देखकर ऐसा लगता है कि आन्दोलन में शामिल एवं सहयोग करने वाले कुछ तत्वों का उद्देश्य शिक्षा में सुधार एवं युवाओं का भविष्य नही, बल्कि आन्दोलन के माध्यम से अपनी रोटी सेंकना है। जो नेतृत्व एवं पार्टियाँ चुनाव के माध्यम से मोदी सरकार को हटाने में सफल नही हुई वह आन्दोलन में अपना भविष्य तलाश रही है। अपराधी एवं हिंसक मानसिकता के लोगों का आन्दोलन में प्रवेश चिंताजनक है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, उनकी स्व० माता जी एवं शिक्षा मंत्री के परिवार के प्रति गालियाँ शिक्षा प्रेमियों का व्यवहार नही हो सकता है। प्रतिबंधित सिमी आतंकी संगठन के संस्थापक सैय्यद कासिम रसूल इलियास की आंदोलन में उपस्थिति का अर्थ समझ से परे है। कश्मीर को पाकिस्तान का अंग, 370 की समाप्ति को गलत बताने वालों का सम्बन्ध नीट छात्रों से नही हो सकता है। सनातन धर्म के देवी-देवताओं का अपमान करने वाले तत्व, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। गोदी मीडिया के नाम पर लक्षित पत्रकारों पर हमला आखिर किस हिंसक प्रवृत्ति का द्योतक है। टूलकिट एवं डीप स्टेट की सफलता की कहानी तो यह आन्दोलन नही कहता? प्रशासन ने पाकिस्तान द्वारा संचालित 480 हैंडल को ब्लॉक किया है। इसका अर्थ है कि आन्दोलन को आधार बनाकर देश विरोधी, समाजविरोधी शक्तियाँ सक्रिय हो रही हैं।
भारत में इस प्रकार के हुए प्रारम्भ के आंदोलनों में तप, त्याग, ह्रदय में पवित्रता, जनकल्याण एवं देश प्रेम प्रकट होता था। यह आन्दोलन बदला, हिंसा, गाली-गलौज से प्रारम्भ एवं समाप्त हुआ। यह संविधान की भावना एवं भारत रत्न बाबा साहेब डॉ० भीमराव अम्बेडकर जी के विचारो को प्रकट नहीं करता। इस आन्दोलन में सक्रिय एवं सहयोगी समर्थन करने वाले सभी श्रेष्ठ जनों से आग्रह है कि वह परीक्षा सहित देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आगे आएं और सुझाव दें ताकि भविष्य में देश को दिशा मिल सके। राजनीतिक दलों के लिए सार्थक चर्चा एवं संवाद का केंद्र संसद है, उसका उपयोग करें।