राजनीति में अब कोई भी नेता किसी को कुछ भी बोल रहे है, यहाँ तक अपने टक्कर के नेता की घर की बात को मीडिया के सामने उगल रहे है। तनिक भी लाज शर्म नहीं है। बोलने से परहेज नहीं कर प् रहे है। अगर कोई नेता पार्टी बदलता है तो वो उनकी इच्छा अनुरूप होती है। लेकिन पार्टी बदलने वाले नेता को तीखी बात सुननी पड़ती है। गद्दार करार दे दिया जाता है। कई ऐसे राजनीति घटनाक्रम देखने को मिल चुके है। हाल ही में बीजेपी बंगाल चुनाव जीती है। TMC का पत्ता साफ़ कर अपनी सरकार बना ली है। बंगाल में बीजेपी की सरकार बनते ही ममता की पार्टी TMC के नेता दल बदलना शुरू कर दिए है। TMC के कई सांसद और नेता नई पार्टी बनाकर बीजेपी को समर्थन देने का भी ऐलान किया है।
बंगाल के बाद एमपी में कांग्रेस के साथ खेला हो गया। अब महाराष्ट्र में UBT शिवसेना के सांसद के बीजेपी में आने की चर्चा है। जिसे लेकर संजय राउत का बयान सामने आया। उन्होंने मीडिया के सामने पार्टी बदलने वाले नेताओं को गाली देने शुरू कर दिया। जब उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आई तो संजय राउत पलट गए और गाली देने को सामान्य बातचीत की भाषा बताने लगे।
सवाल – गाली देने वाले नेताओं पर कानून कार्रवाई की छूट क्यों
भारतीय राजनीति में गाली देने वाले संजय राउत जैसे कई नेता है। चाहे वे बीजेपी के हो या कांग्रेस व अन्य पार्टी के। सरेआम आम गाली देने वाले नेता को जन प्रतिनिधि कहना हमारे लिए शर्म की बात है। जो नेता खुद की बात पर लगाम नहीं लगा पा रहे है, वे जनता हित में क्या काम करेंगे। भारतीय कानून के तहत ऐसे नेताओं पर सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। 6 महीने की सजा का प्रावधान रखा जाना चाहिए। ताकि उसे अपनी गलती का अहसास हो। खुलेआम गाली देना मतलब जनता के बीच अशांति फैलाना।