DGP को जज साहब ने भेजा आदेश, ऑटो चालक की हत्या मामले में आरोपी बरी, अधूरी थी जांच रिपोर्ट

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में वर्ष 2019 में ऑटो चालक मनोज की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी कुंटू उर्फ देवेंद्र सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। करीब सात साल तक चले मुकदमे में विवेचना की खामियां सामने आने के बाद अपर जिला जज मृदुल दुबे ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने विवेचना में घोर लापरवाही बरतने के मामले में संबंधित विवेचक के खिलाफ डीजीपी, पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को आदेश की प्रति भेजी है।

क्या है पूरा मामला?

मामला आगरा के सदर थाना क्षेत्र के रोहता का है। यहां रहने वाले ऑटो चालक मनोज 22 जनवरी 2019 को ऑटो लेकर घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था। अगले दिन मोहल्ले के एक व्यक्ति ने परिजनों को सूचना दी कि मनोज का शव रोहता इंटर कॉलेज के पीछे कच्चे रास्ते पर पड़ा है।

सूचना मिलने पर मनोज की पत्नी सीमा अपने बेटे के साथ मौके पर पहुंचीं और शव की पहचान की। सीमा ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि घटना से करीब दो महीने पहले मनोज का कुंटू उर्फ देवेंद्र से विवाद हुआ था। इसी आधार पर उन्होंने मनोज की हत्या में देवेंद्र पर संदेह जताया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया।

विवेचना में नहीं जुटाए गए ठोस साक्ष्य

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सीमा, मृतक के भाई संजय, चिकित्सक और विवेचक समेत आठ गवाह पेश किए। हालांकि, अदालत के मुताबिक गवाहों के बयानों से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी कड़ियां नहीं जुड़ सकीं, जिनसे आरोपी के खिलाफ अपराध साबित हो सके।

अदालत ने विवेचना को अव्यवस्थित, अपूर्ण और कमजोर बताते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक साक्ष्य जुटाने का पर्याप्त प्रयास नहीं किया गया। जांच में ऐसा कोई प्रत्यक्षदर्शी भी सामने नहीं लाया गया, जिसने मृतक को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा हो। इसके अलावा हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी नहीं हुई और न ही घटना किस तरह हुई, इसका स्पष्ट विवरण सामने आया।

आरोपी के बयान में केवल एक लाइन, अदालत ने उठाए सवाल

अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी के बाद विवेचक ने उसके बयान में कथित तौर पर केवल इतना दर्ज किया कि उससे गलती हो गई। लेकिन बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि हत्या कब, कैसे और क्यों की गई। इसके बाद विवेचक ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप लगाकर आरोप पत्र दाखिल कर देने और केस डायरी तैयार करने से किसी अभियुक्त का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। दोषसिद्धि के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं।

आरोपी की ओर से अधिवक्ता उमेश चंद शर्मा ने अदालत में पक्ष रखा। अंततः अपर जिला जज मृदुल दुबे ने साक्ष्यों के अभाव में कुंटू उर्फ देवेंद्र सिंह को बरी कर दिया। साथ ही विवेचना में गंभीर लापरवाही को लेकर संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवेचक को अदालत में अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिलेगा।

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