हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित पूर्व सैनिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश की सुरक्षा में सैनिकों के योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ लोग जिस शांति और सुरक्षा के साथ जीवन जी रहे हैं, उसके पीछे सीमा पर दिन-रात डटे हमारे सैनिकों का सबसे बड़ा योगदान है।
सैनिकों के जज्बे को किया सलाम
नितिन नबीन ने कहा कि उन्हें जब सरहद पर जाकर उन इलाकों को देखने का अवसर मिला, जहां सैनिक कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा के लिए तैनात रहते हैं, तब उन्हें सैनिकों के त्याग और समर्पण का एहसास और गहराई से हुआ।
उन्होंने कहा कि सैनिक धूप, बारिश और मौसम की कठिन परिस्थितियों की परवाह किए बिना लगातार देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों को भी नमन किया।
उत्तराखंड को बताया ‘पंचम धाम’
भाजपा अध्यक्ष ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की पहचान केवल चारधाम से ही नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड को सैनिकों की भूमि के रूप में ‘पंचम धाम’ कहे जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे प्रदेश के वीर सैनिकों के सम्मान से जोड़ा।
घोड़ाखाल सैनिक स्कूल का किया जिक्र
नितिन नबीन ने कहा कि 1967 में घोड़ाखाल में सैनिक स्कूल की स्थापना हुई थी और वहां से अब तक 800 से अधिक छात्र अफसर बनकर देश की सेवा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की इसी पवित्र भूमि ने देश को पहला CDS जनरल बिपिन रावत भी दिया।
उन्होंने अपने वरिष्ठ नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को भी याद किया और उनके योगदान को नमन किया।
लाल चौक का अनुभव भी किया साझा
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने राजनीतिक जीवन के पुराने अनुभव को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2011 में भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रहते हुए उन्हें राष्ट्रीय एकता यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में कश्मीर जाने का अवसर मिला था।
उन्होंने कहा कि उस समय लाल चौक पर तिरंगा फहराने की योजना को लेकर तैयारी की जा रही थी और वहां का माहौल आज की तुलना में काफी अलग था। नितिन नबीन ने कहा कि आज कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा लहराता देखकर हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा होता है।
युवाओं को सीमा देखने की अपील
नितिन नबीन ने कहा कि सैनिक परिवारों में जन्मे युवाओं को सीमाओं पर सैनिकों के जीवन और परिस्थितियों का एहसास रहता है। उन्होंने देश के अन्य युवाओं से भी कभी अवसर मिलने पर सीमा क्षेत्रों का दौरा करने की अपील की, ताकि वे प्रत्यक्ष रूप से देख सकें कि देश की रक्षा करने वाले जवान किन कठिन परिस्थितियों में अपना कर्तव्य निभाते हैं।