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राज्य स्थापना दिवस पर छत्तीसगढ़ का अपमान और सनातन के पावन पर्व पर खलल डालना कांग्रेस का असली चरित्र : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने 1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शन को छत्तीसगढ़ की अस्मिता, सनातन संस्कृति और देश के अर्थतंत्र पर सोचा-समझा हमला करार देते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। ठाकुर ने कहा कि “वोट चोरी” और चुनाव आयोग के खिलाफ झूठा व भ्रामक नैरेटिव गढ़कर कांग्रेस देश में अराजकता और अस्थिरता फैलाने की कुत्सित कोशिश कर रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं की भागीदारी उनके राज्य-विरोधी चेहरे को बेनकाब करती है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ठाकुर ने कहा कि 1 नवंबर का दिन समूचे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और गौरव का दिन है। इस दिन राज्य की जनता अपना स्थापना दिवस मनाती है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर छत्तीसगढ़वासियों के साथ कंधा-से-कंधा मिलाकर खड़े होने, प्रदेश के विकास और जन-कल्याण के संकल्प को दोहराने के बजाय छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेता दिल्ली में अराजकता का एजेण्डा सेट करने जा रहे हैं। अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता खो चुकी कांग्रेस को छत्तीसगढ़ की पहचान और स्वाभिमान से कोई सरोकार नहीं है; वे केवल अपने आकाओं को खुश करने के लिए राज्य की जनता की भावनाओं का सौदा कर रहे हैं।

ठाकुर ने कांग्रेस के सनातन विरोधी रवैये को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, उल्लास और समृद्धि का महापर्व है। कांग्रेस ने जान-बूझकर ऐन दीपावली के समय दिल्ली में यह प्रदर्शन रचने की तारीख चुनी है ताकि पूरे देश में भय और व्यवधान का माहौल बने और लोग पर्व की खुशियों से वंचित हों। सत्ता की हताशा में कांग्रेस विदेशी ताकतों और राष्ट्रविरोधी षड्यंत्रों के आगे पूरी तरह नतमस्तक हो चुकी है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस अपने इस पाखण्ड से न सिर्फ जनता को परेशान कर रही है, बल्कि देश और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने पर भी आमादा है। दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले इस हंगामे के कारण त्योहार के पीक सीजन में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ के कारोबार पर पड़ेगा। ठाकुर ने सवाल किया कि छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और पटरी वालों की रोजी-रोटी छीनकर कांग्रेस कौन-सी राजनीति साधना चाहती है? कांग्रेस की संवेदनहीनता पर भी तीखा सवाल उठाते हुए ठाकुर ने कहा कि 1 नवंबर की तारीख तय करने के पीछे कांग्रेस की काली नीयत साफ दिखती है।

1 नवंबर 1984 वही मनहूस दिन है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद कांग्रेस के संरक्षण में दिल्ली सहित पूरे देश और छत्तीसगढ़ में निर्दोष सिख भाई-बहनों का नृशंस कत्लेआम किया गया था। छत्तीसगढ़ के सिख समाज के उन गहरे आँसुओं और काले इतिहास से मुँह मोड़कर छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी उसी तारीख को दिल्ली की सड़कों पर अराजकता का नया ड्रामा रचने जा रहे हैं। यह सिख समाज की भावनाओं और संवेदनाओं का खुला उपहास है।

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