रायपुर। ‘ज्ञानु और जानू’ वीडियो को लेकर विवाद गहराने के बीच जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नेता अमित जोगी ने अपना पक्ष सामने रखा है। जोगी निवास पर पुलिस द्वारा नोटिस चस्पा किए जाने के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने खुद को भगोड़ा बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वे भगोड़े नहीं हैं, बल्कि इन दिनों गुजरात में गुजरात पुलिस की सुरक्षा में हैं।
अमित जोगी ने अपने वीडियो में कहा कि भगोड़ा वह होता है जो कानून से भागता है, जबकि वे आज भी गुजरात पुलिस की सुरक्षा में हैं। उन्होंने ‘ज्ञानु और जानू’ वीडियो के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका मतलब बेहद साधारण था। उनके मुताबिक, आज चुनाव से लेकर वोटर तक का एकाधिकार केवल दो लोगों के पास है।
अमित जोगी ने वीडियो को लेकर उठे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक व्यंग्य को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 के तहत लाना लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है। उन्होंने कहा कि अरिस्टोफेनेस से लेकर विदूषक तक, व्यंग्य और हास्य हमेशा से लोकतंत्र के पहरेदार रहे हैं।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह मुद्दा केवल उनके तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं बड़ा है। उनके अनुसार, असली मुद्दा धांधली-युक्त चुनाव प्रणाली और उससे भी महत्वपूर्ण असहमति का अधिकार है।
अमित जोगी ने अपने संदेश में खास तौर पर जेन-जी युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने एक शब्द में अपना संदेश देते हुए कहा- “Discord”, यानी असहमति और अवज्ञा। इसके साथ उन्होंने अंग्रेजी में कहा, “Where there’s a will, there’s a way”, जिसका अर्थ है कि जहां चाह होती है, वहां राह निकल आती है।
अपने वीडियो के अंत में उन्होंने छत्तीसगढ़ी अंदाज में ‘मंदिर छत में कौआ बैठे… जागो रे बघुआ!’ कहते हुए लोगों को जागरूक होने का संदेश दिया। फिलहाल ‘ज्ञानु और जानू’ वीडियो को लेकर विवाद और पुलिस की कार्रवाई के बीच अमित जोगी के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।