राजनांदगांव। सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ राजनांदगांव पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। Tata Power Solar कंपनी का जिला डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का झांसा देकर 11 लाख 36 हजार 123 रुपये की ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपियों को पुलिस ने बिहार के बोधगया से गिरफ्तार किया है। आरोपी किराये के मकान में बैठकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। पुलिस ने उनके कब्जे से 7 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, स्कैनर डिवाइस, नोटबुक, एटीएम कार्ड सहित ठगी में इस्तेमाल होने वाली कई सामग्री जब्त की है।
पुलिस के मुताबिक, मामले में प्रार्थी को Tata Power Solar कंपनी का जिला डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का झांसा दिया गया था। आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन शुल्क, सोलर सिस्टम मशीन की अग्रिम कीमत और कंपनी के अधिकारियों के आने-जाने के खर्च के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम जमा कराई। इस तरह आरोपियों ने कुल 11,36,123 रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस थाना राजनांदगांव में अपराध क्रमांक 03/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि आरोपी इंस्टाग्राम पर Tata Power Solar कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम से फर्जी विज्ञापन लिंक तैयार कराते थे। इस लिंक पर इच्छुक लोगों से उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी व्यक्तिगत जानकारी भरवाई जाती थी। जैसे ही कोई व्यक्ति अपनी जानकारी दर्ज करता, उसका पूरा डाटा आरोपियों तक पहुंच जाता था।
इसके बाद आरोपी खुद को Tata Power Solar कंपनी का प्रतिनिधि बताकर संबंधित व्यक्ति से फोन पर संपर्क करते थे और उसे कंपनी का जिला डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का भरोसा दिलाते थे। लोगों का विश्वास जीतने के लिए कंपनी के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर ईमेल के माध्यम से भेजे जाते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, मशीन की अग्रिम कीमत और अन्य खर्चों के नाम पर अलग-अलग किश्तों में पैसे वसूले जाते थे।
फर्जी सिम और बैंक खातों से करते थे ठगी की रकम का लेन-देन
पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए पश्चिम बंगाल के कोलकाता क्षेत्र से कमीशन पर फर्जी मोबाइल सिम और बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पीड़ितों से इन खातों में रकम जमा कराई जाती थी। इसके बाद एटीएम से नगद निकासी और फोन-पे के माध्यम से पैसों का लेन-देन किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान प्रार्थी से अलग-अलग किश्तों में 11,36,123 रुपये की ठगी करना स्वीकार किया है। ठगी से प्राप्त रकम को दोनों आरोपी आपस में और अपने अन्य सहयोगियों के साथ कमीशन के आधार पर बांट लेते थे।
बोधगया में किराये का मकान लेकर चला रहे थे साइबर ठगी का नेटवर्क
राजनांदगांव पुलिस ने ‘मिशन साइबर सुरक्षा’ के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक सत्य प्रकाश तिवारी के पर्यवेक्षण में विशेष टीम गठित की। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विनय पम्मार के नेतृत्व में टीम बिहार के बोधगया रवाना हुई। वहां दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रशांत कुमार उर्फ निक्की (27 वर्ष), निवासी ग्राम सारे, जिला नालंदा और अभिषेक कुमार यादव उर्फ रवि (34 वर्ष), निवासी ग्राम विशुनबीघा, जिला औरंगाबाद, बिहार के रूप में हुई है।
मोबाइल, लैपटॉप और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए विभिन्न कंपनियों के 7 मोबाइल फोन, एक एचपी लैपटॉप, एक स्कैनर डिवाइस, ग्राहकों और बैंक खातों का विवरण दर्ज दो नोटबुक, दो एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की है।
जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में फर्जी बैंक खातों, सिम उपलब्ध कराने वालों और साइबर ठगी से जुड़े अन्य सहयोगियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है।