धमतरी। रबी वर्ष में 4300 क्विंटल बीज का वितरण किया गया तथा 5379 कृषकों को 20 करोड़ 54 लाख 31 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया गया। फसल क्षेत्र में हुए बदलाव इस अभियान की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं-
सरसों का रकबा गत वर्ष 2670 हे. से बढ़कर 5726 हे. हो गया। मूंगफली की खेती जिले में पहली बार 283 हे. (मगरलोड विकासखंड के बुड़ेनी व चंद्रसुर क्लस्टर) में की गई। सूरजमुखी की खेती गट्टासिल्ली क्लस्टर में पहली बार 100 हे. में प्रारंभ हुई। रबी दलहन का कुल रकबा 21850 हे. से बढ़कर 31500 हे. हो गया। चना का रकबा 15830 हे. से बढ़कर 18179 हे. हुआ। मक्का का रकबा 430 हे. से बढ़कर 1000 हे. से अधिक हो गया। लघु धान्य फसल रागी का उत्पादन इस वर्ष 500 हे. में किया जा रहा है। ये आंकड़े प्रमाण हैं कि किसान अब परंपरागत सोच से आगे बढ़कर लाभकारी और टिकाऊ कृषि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

किसानों की आय और पर्यावरण-दोनों को लाभ
फसलचक्र परिवर्तन का असर केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहा। दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ा रही हैं, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घट रही है और उत्पादन लागत कम हो रही है। तिलहन फसलों से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है। कम पानी वाली फसलों से सिंचाई पर दबाव घटा, भू-जल संरक्षण को बल मिला और पर्यावरण संतुलन की दिशा में ठोस कदम बढ़े।
समर्थन मूल्य से बढ़ा किसानों का भरोसा
फसलचक्र परिवर्तन में सम्मिलित किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा प्रथम बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चना की खरीदी की गई। इस वर्ष भी समर्थन मूल्य पर खरीदी हेतु सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं, जिससे किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
एक अनुकरणीय शासकीय मॉडल
कुल मिलाकर, धमतरी जिले में फसलचक्र परिवर्तन एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के सतत मार्गदर्शन, प्रशासनिक संकल्प और किसानों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही नीति, मजबूत इच्छाशक्ति और जनभागीदारी से जल संरक्षण और कृषि समृद्धि साथ-साथ संभव है। यह पहल न केवल धमतरी के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है। आने वाले वर्षों में यही प्रयास धमतरी को कृषि नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी जिला बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।