बलरामपुर। जिले से शिक्षिकाओं के समर्पण की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो शिक्षा के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दिखाती है। वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव के प्राथमिक स्कूल में पदस्थ दो महिला शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ाने के लिए रोजाना मुश्किल रास्तों से स्कूल पहुंचती हैं।
मानसून के दौरान धौरपुर गांव तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। शिक्षिकाओं को मोरन और इरिया नदियों के संगम को पार करना पड़ता है। इसके बाद करीब 3 किलोमीटर का पथरीला रास्ता तय कर वे स्कूल पहुंचती हैं।
सबसे भावुक कर देने वाली बात यह है कि इनमें से एक शिक्षिका अपनी 9 महीने की बेटी को गोद में लेकर नदी पार करती हैं और फिर स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाती हैं।
मुश्किल रास्ता, लेकिन बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी
बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और रास्ते के कठिन होने के बावजूद दोनों शिक्षिकाएं अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हट रही हैं। उनके इस समर्पण और हौसले की क्षेत्र में तारीफ हो रही है। यह कहानी बताती है कि दुर्गम परिस्थितियों के बीच भी शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।