बेटे का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं, बाइक देने पर पिता को 3 माह की हुई जेल, दुर्ग शहर का मामला

दुर्ग। जिले में सड़क दुर्घटना के एक मामले में सत्र न्यायालय ने वाहन चलाने वाले पुत्र के साथ-साथ उसे बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के मोटरसाइकिल देने वाले पिता को भी दोषी ठहराया है। न्यायालय ने पिता मोहन लाल बघेल को मोटरयान अधिनियम की धारा 5/180 के तहत 3 माह के साधारण कारावास और 5,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, मोटरसाइकिल चालक मोहित कुमार बघेल को विभिन्न धाराओं के तहत कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया है।

पुलिस के अनुसार, घटना 4 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे इंदु आईटी स्कूल, कोहका के पास हुई थी। मोटरसाइकिल क्रमांक CG 07 CW-2768 चला रहे मोहित कुमार बघेल ने तेज एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए एक्टिवा क्रमांक CG 19 A-2771 को टक्कर मार दी थी। हादसे में एक्टिवा चालक शादान अली की मौत हो गई थी, जबकि पीछे बैठे उत्तम पांडेय गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

घटना के बाद पुलिस चौकी स्मृतिनगर, थाना सुपेला में अपराध क्रमांक 1025/2025 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना की गई। जांच के दौरान सामने आया कि मोहित कुमार बघेल के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद उसके पिता मोहन लाल बघेल ने उसे मोटरसाइकिल चलाने के लिए दी थी।

पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई सत्र प्रकरण क्रमांक 55/2026 के तहत हुई।

सत्र न्यायालय, दुर्ग ने 31 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए मोहित कुमार बघेल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 105(2) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, धारा 110(2) के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड लगाया गया।

इसके अलावा मोटरयान अधिनियम की धारा 184 के तहत 10 माह का साधारण कारावास और 3,000 रुपये अर्थदंड तथा धारा 3/181 के तहत 3 माह का साधारण कारावास और 5,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

न्यायालय ने मोहन लाल बघेल को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले पुत्र को वाहन चलाने देने के मामले में दोषी ठहराते हुए 3 माह का साधारण कारावास और 5,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 7 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

इस मामले में दुर्ग पुलिस की विवेचना और न्यायालयीन पैरवी के बाद पिता-पुत्र दोनों को दोषसिद्ध किया गया। यह फैसला बिना लाइसेंस वाहन चलाने और नाबालिग या अयोग्य चालक को वाहन सौंपने के जोखिमों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देता है।

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