रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार के सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व में बस्तर संभाग के अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का संकल्प अब तेजी से धरातल पर उतर रहा है। सुकमा जिले के धुर नक्सल प्रभावित एवं दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में दशकों से व्याप्त अंधेरे को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के कुशल मार्गदर्शन में कोंटा विकासखंड के 58 अविद्युतीकृत गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 31.62 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। यह कदम राज्य सरकार की वनांचल के सर्वांगीण विकास और अंतिम व्यक्ति तक रोशनी पहुंचाने की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राज्य शासन की महत्वाकांक्षी “नियद नेल्लानार योजना“ (आपका अच्छा गांव) के प्रभावी क्रियान्वयन से इस महत्वपूर्ण विद्युतीकरण परियोजना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। कार्यपालन अभियंता श्री एचके ध्रुव ने बताया कि कोंटा विकासखंड के अत्यंत सुदूरवर्ती और वर्षों से पहुंचविहीन माने जाने वाले गांव जैसे जिन्नेलंका, बंजेवाही, रेडलापल्ली, पेंटापाड, एण्टापाड, जग्गावरम, गोमपाड़, दन्तेशपुरम, नीलावाया और सिंगाराम सहित दर्जनों बस्तियां अब मुख्यधारा से जुड़ने जा रही हैं। दशकों से लाल आतंक और भौगोलिक विषमताओं के साये में जी रहे इन क्षेत्रों में प्रशासन की यह पहल न केवल विश्वास का नया सेतु तैयार कर रही है, बल्कि विकास की नई गाथा भी लिख रही है।
इस परियोजना के मूर्त रूप लेने से क्षेत्र के 3,929 ग्रामीण परिवारों के घरों में आजादी के बाद पहली बार बिजली का उजाला पहुंचेगा। घरों के रोशन होने से ग्रामीणों को दैनिक जीवन में अंधेरे और असुरक्षा से स्थायी निजात मिलेगी। महिलाओं को घरेलू कामकाज में सुविधा होगी और रात के समय आवागमन व सामान्य जनजीवन सुगम बनेगा। अंधेरे में सिमटे रहने वाले इन गांवों में विद्युत अधोसंरचना के विस्तार से ग्रामीण जीवन स्तर में अभूतपूर्व गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
बिजली के आगमन से स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और सूचना तंत्र में एक युगांतकारी बदलाव आएगा। स्कूलों और आश्रम-छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों को रात में पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा डिजिटल शिक्षा की राह आसान होगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व उपकेंद्रों में दवाओं के सुरक्षित भंडारण (कोल्ड चेन) और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों के संचालन से स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही, मोबाइल कनेक्टिविटी और संचार व्यवस्था बेहतर होने से ग्रामीण सीधे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ सकेंगे, जिससे क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और खुशहाली के नए द्वार खुलेंगे।
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार के मंशानुरूप सुकमा के अंतिम छोर तक बसे हर ग्रामीण तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। “नियद नेल्लानार योजना“ के तहत कोंटा विकासखंड के 58 गांवों में बिजली पहुंचना सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि दशकों से अंधेरे में रहे 3,929 परिवारों के जीवन में नई उम्मीद की शुरुआत है। बिजली आने से इन क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और संचार तंत्र मजबूत होंगे। हमारा प्रयास है कि गुणवत्ता के साथ कार्य तय समय सीमा में पूरा हो, ताकि ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़कर क्षेत्र में समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।