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रायगढ़ : आतंकवादी केस में फंसाने की धमकी, रिटायर्ड शिक्षक को आया फोन, समझदारी के चलते साईबर ठगी नाकाम

रायगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” का असर अब लोगों में साफ दिखाई देने लगा है। साइबर ठगी के नए तरीकों के प्रति जागरूक नागरिक अब ठगों के झांसे में आने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना दे रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला रायगढ़ में सामने आया, जहां एक रिटायर्ड शिक्षक ने फर्जी पुलिस अधिकारी के कॉल को पहचानकर साइबर ठगी के प्रयास को नाकाम कर दिया।रिटायर्ड शिक्षक एवं केंद्रीय सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी तिलक कुमार कटकवार ने पुलिस कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया।

कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई स्थित सेंट्रल कमिश्नर कार्यालय का अधिकारी बताते हुए कहा कि दो आतंकवादी पकड़े गए हैं और उनके पास कटकवार के नाम का सिम कार्ड मिला है।इसके बाद आरोपी ने उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने की बात कहकर डराने-धमकाने का प्रयास किया। हालांकि, कटकवार ने घबराने के बजाय कॉलर की बातों पर भरोसा नहीं किया और साफ तौर पर उसके झांसे में आने से इनकार कर दिया। इसके बाद वे स्वयं पुलिस कार्यालय पहुंचे और घटना की जानकारी दी।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अनजान नंबर से पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर आने वाले कॉल से घबराएं नहीं। बैंक खाता, एटीएम, ओटीपी, यूपीआई, आधार या अन्य निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल कॉल काटकर पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

घरघोड़ा, खरसिया और तमनार में भी चला अभियान

साइबर जागृति अभियान के तहत घरघोड़ा, खरसिया और तमनार क्षेत्र में भी पुलिस द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों को साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताए गए और “साइबर अवेयरनेस सेल्फी” लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

गांवों से क्रिकेट मैदान तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

पूंजीपथरा पुलिस ने छर्राटांगर, सराईपाली और पूंजीपथरा क्षेत्र में पोस्टर-बैनर के जरिए लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया।

पुलिस टीम क्रिकेट टूर्नामेंट में पहुंची और युवाओं को ऑनलाइन ठगी के विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी।पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी नौकरी, लोन ऐप, सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट, फर्जी निवेश, यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट और केवाईसी अपडेट के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की अपील की। साथ ही अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड नहीं करने और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की सलाह दी।पुलिस ने स्पष्ट किया कि “डिजिटल गिरफ्तारी” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

यदि कोई व्यक्ति पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर पूछताछ, गिरफ्तारी अथवा खाते में पैसे जमा करने का दबाव बनाए तो तत्काल कॉल काटकर पुलिस को सूचना दें।इस दौरान थाना पूंजीपथरा के प्रशिक्षु उप निरीक्षक मनीष पोया, आरक्षक ओमप्रकाश तिवारी, विनोद शर्मा एवं नरेंद्र पैंकरा सहित पुलिस टीम मौजूद रही।

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