दिल्ली। वडनगर से वाराणसी जाने वाले दल के साथ PM मोदी ने संवाद किया। उन्होंने कहा, हमारे यहां कहा जाता है कि जब कोई यात्रा करके वापस आता है और आप उनको प्रणाम करते हैं, तो यात्रा का जो पुण्य है, उसका आधा पुण्य उस व्यक्ति को मिलता है, जो यात्रियों को प्रणाम करता है। तो आज मैं भी सभी सेवा यात्रियों को प्रणाम करके आपका आधा पुण्य चुरा रहा हूं।
सेवा ही हमारा मुख्य कार्य होना चाहिए और सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश देना है, कोई उपदेश नहीं देना है। हम सेवा करके ही सेवा का संदेश देंगे, शब्दों में नहीं देंगे। हमारे आचरण से ही लोगों को पता चले कि राजनीति में सत्ता कितनी ही बड़ी क्यों न हो जाए, लेकिन हमारा मार्ग सेवा का ही रहेगा। हम कभी भी सेवा के मार्ग से विचलित नहीं होंगे। कितने ही ऊंचे शिखर पर पहुंचेंगे, लेकिन ‘सेवा परमो धर्म:’ के भाव को लेकर ही आगे बढ़ेंगे।
मैं सेवा संकल्प यात्रा से जुड़े सभी लोगों को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। वाराणसी और वडनगर दोनों प्राचीन नगरी हैं जो हजारों वर्षों से जीवंत बनी हुई हैं। एक मेरा जन्मस्थान है, और दूसरा मेरी कर्मभूमि।
जब मैं संगठनात्मक स्तर पर काम कर रहा था, तो मेरे पास यात्राओं पर यात्रा करने का अनुभव था। लेकिन जब मैंने स्वयं एक यात्रा की, तो मैंने महसूस किया कि किसी को कितनी चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। फिर भी, आप सभी ने इस कार्य को बड़ी समर्पण के साथ आगे बढ़ाया है।
जब मैं संगठनात्मक स्तर पर काम कर रहा था, तो मेरे पास यात्राओं पर यात्रा करने का अनुभव था। लेकिन जब मैंने स्वयं एक यात्रा की, तो मैंने महसूस किया कि किसी को कितनी चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। फिर भी, आप सभी ने इस कार्य को बड़ी समर्पण के साथ आगे बढ़ाया है।