रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में संशोधन करते हुए संशोधित अतिथि व्याख्याता नीति-2026 का कार्योत्तर अनुमोदन किया है। संशोधित नीति में चयन प्रक्रिया, अनुभव, पुनर्नियोजन और मानदेय से जुड़े प्रावधानों को अधिक स्पष्ट किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के अंक समान होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता दी जाएगी।
संशोधित नीति में अनुभव के लिए निर्धारित अधिकतम 30 अंकों के भीतर राजकीय विश्वविद्यालय में अध्यापन अनुभव को भी शामिल किया गया है। अब शासकीय महाविद्यालय या राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र के दौरान न्यूनतम 5 माह अध्यापन कार्य पूरा करने पर 5 अंक दिए जाएंगे। पूर्व नीति में राजकीय विश्वविद्यालय में प्राप्त अध्यापन अनुभव के लिए यह प्रावधान स्पष्ट रूप से शामिल नहीं था।
मंत्रिपरिषद ने शासकीय महाविद्यालयों के साथ-साथ राजकीय विश्वविद्यालयों के विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के अनुभव का उपयोग करते हुए उन्हें रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर देने का निर्णय लिया है। इसके अलावा अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय निर्धारण में मौजूद विसंगतियों को दूर करने के लिए कालखंड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय लागू किया जाएगा।
संशोधित नीति में अतिथि व्याख्याताओं और अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि और आकस्मिक अवकाश से संबंधित प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है। सरकार का यह संशोधन अतिथि शैक्षणिक अमले की चयन प्रक्रिया और सेवा से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट करने के उद्देश्य से किया गया है।