धर्मेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा का उम्मीदवार बनना बीजेपी की कथनी और करनी में एक होने का सशक्त उदाहरण हैं. लक्ष्मी वर्मा संगठन में सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ता हैं. रायपुर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और राज्य महिला आयोग की सदस्य होने के नाते उनके पास संगठन और सत्ता का अच्छा अनुभव है.बीजेपी ने लक्ष्मी वर्मा को टिकट देकर साबित कर दिया की जो भी पार्टी के लिए काम करेगा उसका हक सदैव सुरक्षित रहेगा. लक्ष्मी वर्मा की पार्टी के महिला कैडर में मजबूत पकड़ मानी जाती है और उन्होंने लंबे समय से सक्रिय राजनीति में कई पदों पर अपनी भूमिका का जिम्मेदारी से निर्वहन किया है.संगठनात्मक अनुभव और महिला मतदाताओं के बीच प्रभाव को देखते हुए बीजेपी ने इस बार राज्यसभा के लिए उन पर दांव लगाया है.
फोटो- धर्मेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार

लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने दिग्गज पॉलिटिकल पंडितों को भी हैरान कर दिया है, जो सुबह-शाम नये-नये नाम को लेकर कयास लगा रहे थे. दरअसल बीजेपी में लक्ष्मी वर्मा के साथ ही नारायण चंदेल, कृष्णमूर्ति बांधी, भूपेंद्र सवन्नी, सरोज पांडेय और किरण बघेल जैसे नेताओं के नाम रेस में बताए जा रहे थे.लेकिन बीजेपी ने हर बार की तरह सभी कयासों को ध्वस्त करते हुए लो प्रोफाइल रहने वाली लक्ष्मी वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाकर 2028 की तैयारी के संकेत दे दिए हैं. बीजेपी संगठन में लंबे समय से राज्यसभा के लिए किसी महिला को आगे लाने की चर्चा थी, जिसे अब लक्ष्मी वर्मा के नाम पर अंतिम रूप दे दिया गया है. जातीय समीकरण के लिहाज से बात करें तो वह मनवा कुर्मी समाज से आती हैं. इसी समाज से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपेश बघेल भी आते हैं।
ऐसे में इस निर्णय को वोटबैंक से भी जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि अब मनवा कुर्मी समाज में बीजेपी ने सेंध लगाने की रणनीति तैयार कर ली है. लक्ष्मी वर्मा के रुप में मनवा कुर्मी समाज को नया नेता दे दिया है. साहू समाज ने बीजेपी औऱ कांग्रेस से मिलकर दोनों सीटें साहू समाज के प्रतिनिधि को देने की मांग की थी लेकिन बीजेपी ने इस बार मातृ शक्ति के साथ ही मनवा कुर्मी समाज पर फोकस किया है.छत्तीसगढ़ में मनवा कुर्मी समाज की आबादी 8 लाख से ज्यादा बताई जाती है. कृषि व्यवसाय पर निर्भर मनवा कुर्मी समाज का छत्तीसगढ़ के कृषि विकास में अहम योगदान देता रहा है. बलौदाबाजार, भाटापारा, रायपुर, दुर्ग में मनवा कुर्मी समाज की सबसे ज्यादा आबादी है. प्रदेश की 25 से 30 सीट में इस वर्ग का असरदार प्रभाव है. बीजेपी की राज्यसभा उम्लमीदवार लक्ष्मी वर्मा बलौदाबाजार के मु़ड़पार की रहने वाली हैं. 1990 में भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्य बनीं. संगठन में सक्रियता को देखते हुए तत्कालीन रायपुर सांसद रमेश बैस का सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था. 2001 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा कार्य समिति की सदस्य चुना गया. लक्ष्मी वर्मा 1994 में रायपुर नगर पालिका निगम में पार्षद निर्वाचित हुईं.2010 में रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष बनीं. पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड जीत मिलने के बाद 2024 से वह छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य हैं…गरियाबंद की संगठन प्रभारी के साथ ही उन्होंने प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी निभाई. एक बात तो तय है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने साबित कर दिया है कि अब नई पीढ़ी के नेताओं को जहां अधिक अवसर दे रहे हैं वहीं पार्टी की इमेज सर्वस्पर्शी बनाना चाहते हैं, जिसमें हर वर्ग का प्रतिनिधित्व हो. छत्तीसगढ़ में जहां विधानसभा चुनाव को अभी दो साल से अधिक समय बचा है, ऐसे में लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजकर पार्टी एक बड़ी राजनीतिक लकीर खींचने की तैयारी में है.