रिलायंस ज्वेलर्स का पूर्व कर्मचारी गिरफ्तार, आभूषणों की हेराफेरी का खुलासा

रायपुर। रिलायंस ज्वेलर्स में जेवरात गबन मामले में गोलबाजार पुलिस ने खुलासा किया है। शिकायत के अनुसार स्टोर में रखे लगभग 103.832 ग्राम वजन के तीन सेट (पांच नग) 22 कैरेट सोने के कंगनों के स्थान पर समान वजन एवं डिज़ाइन के नकली कंगन रखकर असली सोने के आभूषणों की हेराफेरी की गई, जिससे कंपनी को लगभग ₹17.50 लाख की आर्थिक क्षति हुई।

प्रकरण में डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल के निर्देश पर परिवीक्षाधीन उप पुलिस अधीक्षक अमित कोसमा और निरीक्षक स्वराज त्रिपाठी के नेतृत्व में अन्वेषण किया गया । प्रकरण की विवेचना के दौरान संदेह स्टोर के पूर्व कर्मचारी मनोज यादव पर केंद्रित हुआ। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी लगातार स्वयं को निर्दोष बताते हुए पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करता रहा, किंतु दस्तावेजी साक्ष्यों, स्टॉक ऑडिट, तकनीकी विश्लेषण तथा गहन पूछताछ के आधार पर उसने हेराफेरी के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य स्वीकार किए।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह वर्ष 2017 से रिलायंस ज्वेलर्स में कार्यरत था तथा ग्राहकों और स्टोर की कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित था। कंपनी की मासिक जमा योजना (Monthly Deposit Scheme) के अंतर्गत कई ग्राहकों से उसका सीधा संपर्क था। आर्थिक तंगी, विभिन्न ऋणों एवं वित्तीय दबाव के कारण उसने पहले ग्राहकों द्वारा जमा कराई गई राशि का निजी उपयोग करना शुरू किया। बाद में जब ग्राहकों द्वारा आभूषणों की मांग की जाने लगी, तब उसने स्टोर से असली सोने के कंगन निकालकर उनकी जगह समान वजन एवं डिज़ाइन के नकली कंगन रखना शुरू कर दिया।

आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि वह स्टोर की नियमित कार्यप्रणाली का लाभ उठाता था। रिलायंस ज्वेलर्स द्वारा स्वर्ण शोधन (मेल्टिंग) के लिए जिस अधिकृत प्रतिष्ठान की सेवाएं ली जाती थीं, वहां वह अपनी आधिकारिक यूनिफॉर्म में पहुंचता था। चूंकि वह पूर्व से कंपनी के कार्य से वहां आता-जाता था, इसलिए उसकी गतिविधियों पर किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ। आरोपी वहां असली सोना गलवाकर उसे विभिन्न ग्राहकों के लेन-देन में उपयोग करता रहा तथा कुछ मामलों में ग्राहकों को यह कहकर आभूषण उपलब्ध कराए कि वे उन्हें स्टोर में एक्सचेंज कर सकते हैं।विवेचना में यह भी सामने आया कि आरोपी ने किश्तों के माध्यम से सोने के आभूषण खरीदने वाली दो महिला ग्राहकों के साथ भी छल किया।

पहले उनके पैसों एवं आभूषणों में हेराफेरी की गई और बाद में उन्हें फर्जी बिलों के माध्यम से आभूषण उपलब्ध कराकर वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास किया गया। आरोपी के मेमोरेंडम कथन के आधार पर संबंधित आभूषण एवं बिल जप्त किए गए। रिलायंस ज्वेलर्स से सत्यापन कराने पर प्रस्तुत बिल फर्जी पाए गए, जिसके आधार पर प्रकरण में धारा 336(3), 318(4), 338 एवं 340(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई।

जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन का परीक्षण भी किया गया। तकनीकी विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी पुलिस जांच, गिरफ्तारी, जमानत तथा पूछताछ की प्रक्रिया से संबंधित विषयों पर ऑनलाइन एवं AI आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर रहा था। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पर विभिन्न ऋण एवं वित्तीय देनदारियां थीं तथा वह आर्थिक दबाव में था। इन तथ्यों की भी विवेचना की जा रही है।

आरोपी की निशानदेही पर एक रेडमी कंपनी का मोबाइल फोन तथा फर्जी बिलों के माध्यम से बेचे गए लगभग 80 ग्राम सोने के आभूषण, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹14.50 लाख है, जप्त किए गए हैं। पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने पर आरोपी मनोज यादव को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

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