श्रावणी पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर भक्तिमय हुआ संत आशाराम आश्रम

रायपुर। श्रावणी पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के पावन अवसर पर लवकुश वाटिका, वीआईपी रोड स्थित संत आशाराम आश्रम में भक्ति, अध्यात्म और संस्कारों से ओतप्रोत विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संत आशाराम के कृपापात्र शिष्य रामा भाई के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण एवं ईश्वर वंदना के साथ हुआ। इस दौरान गीता-भागवत श्रवण, सत्संग, भजन-कीर्तन सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए और पूरे आश्रम परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

सत्संग के दौरान रामा भाई ने भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहारों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे पर्व केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन में संस्कार, सद्भाव, संयम, सेवा और ईश्वर-भक्ति को बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन के व्यापक महत्व को बताते हुए परिवार, समाज, राष्ट्र, प्रकृति और समस्त जीव-जगत के प्रति कर्तव्य एवं रक्षा के भाव को महत्वपूर्ण बताया।

सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का हुआ आयोजन

श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर आश्रम परिसर में सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार भी संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ आयोजित इस संस्कार में अनेक परिवारों ने सहभागिता की। बालकों एवं उनके परिजनों में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दौरान संस्कारों को भारतीय जीवन-पद्धति की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए अनुशासन, सदाचार और कर्तव्यबोध के महत्व पर चर्चा की गई।

सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया सत्संग का लाभ

रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सत्संग एवं भजन-कीर्तन के पश्चात श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विश्व कल्याण, राष्ट्र की सुख-समृद्धि और सभी प्राणियों के मंगल की कामना के साथ प्रार्थना की गई। आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति, आत्मिक शांति और भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़ने का प्रेरणादायी अवसर प्रदान किया।

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