ओडिशा/दिल्ली। केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जुएल ओराम ने अपनी ही पार्टी के सहयोगियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जुएल ओराम ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटवाने और उनकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। उनके इस बयान से ओडिशा की राजनीति में खलबली मच गई। आपको बता दें कि यह पूरा विवाद केंद्रीय मंत्री के करीबी सहयोगी राकेश पासवान की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ। ओडिशा के राउरकेला में एक संगठित अपराध के मामले में संलिप्तता के आरोप में पुलिस ने राकेश पासवान को हिरासत में लिया है। आरोप है कि राकेश पासवान ने एक सरकारी गेस्ट हाउस में अपराधियों को पनाह दी थी। हालांकि, पासवान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इस मामले पर जुएल ओराम ने पहले कहा था कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए और कानूनी कार्यवाही में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी ही पार्टी के विरोधी गुट पर हमला बोल दिया।
सुंदरगढ़ लोकसभा सीट से छह बार सांसद रह चुके ओराम ने कहा कि पार्टी के कुछ नेता पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके। उनका कहना था कि ये नेता सोचते हैं कि यदि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया जाए, तो उन्हें मंत्री पद मिल जाएगा। ओराम ने यह भी घोषणा की कि इस राजनीतिक साजिश के बाद उन्होंने अपना मन बदल लिया है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने अगला चुनाव न लड़ने का फैसला किया था, लेकिन अब मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वे 2029 का लोकसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे और अपने विरोधियों का सामना करेंगे।
ओराम ने कहा कि वे इस बात की तह तक जाएंगे कि इस दुष्प्रचार के पीछे कौन लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने ओडिशा भाजपा के संगठन महामंत्री से भी शिकायत की है। हालांकि, बातचीत के दौरान उनके एक विवादित बयान ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया। ओराम ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, उनमें उन लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाने और उनके हाथ काटने की क्षमता है।