अंबिकापुर। सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित श्री महावीर अस्पताल में इलाज के दौरान 24 वर्षीय युवक की मौत के मामले में गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। मृतक आशुतोष दास की बहन मुणमयी पाण्डेय ने जिला कलेक्टर एवं मुख्य जिला दंडाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, परिजनों को पूरी जानकारी नहीं देने तथा महत्वपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
शिकायत के अनुसार, आशुतोष दास 13 जून 2026 को सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें श्री महावीर अस्पताल, अंबिकापुर में भर्ती कराया गया, जहां डॉ. चंदन दुबे ने उनके सिर का ऑपरेशन किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि 11 अगस्त 2026 तक इलाज के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से 6 से 7 लाख रुपये नकद और फोनपे के माध्यम से लिए। इस भुगतान और इलाज से संबंधित तथ्यों की पुष्टि के लिए जांच की मांग की गई है।
शिकायत के मुताबिक, 30 अगस्त 2026 को आशुतोष दास की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि मरीज के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण फैलने और लंग एब्सेस बनने के बावजूद उन्हें बीमारी की गंभीरता के बारे में समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि परिजन बार-बार मुख्य चिकित्सक डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता को बुलाने का अनुरोध करते रहे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2 सितंबर को मरीज की स्थिति का सही आकलन किए बिना ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब निकाल दी गई, जिसके बाद उनकी हालत और बिगड़ गई।
शिकायत में उल्लेख है कि 3 सितंबर की रात मरीज की हालत अचानक बिगड़ने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें रायपुर ले जाने की बात कही। परिजनों के अनुसार, रात में सीटी स्कैन और अन्य जांच के नाम पर समय बीतता रहा तथा 4 सितंबर की सुबह करीब 5:30 बजे गंभीर हालत में मरीज को रायपुर रेफर किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि दूसरे अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनके भाई की मौत हो गई।
मृत्यु के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मरीज की पूरी मेडिकल फाइल, सीटी स्कैन की फिल्म और सीडी, एक्स-रे रिपोर्ट तथा ट्रांसफर और डिस्चार्ज समरी मांगी। आवेदन के मुताबिक, उन्हें केवल अधूरी केस शीट दी गई और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड से जांच की मांग
मृतक की बहन ने कलेक्टर से मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है। साथ ही अस्पताल के सभी मूल मेडिकल रिकॉर्ड, सीटी स्कैन, एक्स-रे और अन्य जांच रिपोर्ट सुरक्षित कराने तथा उनकी निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), सरगुजा और पुलिस अधीक्षक (SP), सरगुजा को भी भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अब मामले में निष्पक्ष जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की उपलब्धता अहम होगी। जांच में ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं और मरीज की मौत के लिए कौन-से परिस्थितिजन्य एवं चिकित्सकीय कारण जिम्मेदार थे।