जगदलपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर दशहरा को आस्था, जनजातीय गौरव और पीढ़ियों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना का अनुपम संगम बताया। उन्होंने कहा कि मां दंतेश्वरी के प्रति अटूट श्रद्धा, लोकजीवन में रची-बसी परंपराएं और इन्हें सहेजने में समाज की सामूहिक सहभागिता बस्तर दशहरा को अद्वितीय बनाती है।
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राज्यपाल रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति में इस ऐतिहासिक पर्व में शामिल होने को आत्मीय गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि क्षेत्र की जीवंत परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
विकास के साथ विरासत का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय परंपराएं प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें संरक्षित और संवर्धित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूलमंत्र के साथ राज्य सरकार बस्तर की ऐतिहासिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित है।
जनजातीय समाज की आकांक्षाओं को नई उड़ान
सीएम साय ने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के भाई-बहनों की आशाओं और आकांक्षाओं को नई उड़ान देने के लिए प्रतिबद्ध है। बस्तर की परंपराओं, लोकसंस्कृति और सामाजिक सहभागिता को सहेजते हुए क्षेत्र के विकास को गति देना सरकार का लक्ष्य है। बस्तर दशहरा इसी सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक एकजुटता का जीवंत उदाहरण है।