अमेरिकी चुनाव के परिणाम पर वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा का लेख
ट्रंप ने सारी दुनिया को टैरिफ से धमकाया, अपने दोस्त मुल्कों को सरेआम बेइज़्ज़त किया, नोबेल शांति पुरस्कार लेने के लिए अपनी तारीफों के पुल बांध दिए, अपनी धाक जमाने के लिए ईरान पर हमला किया, सारी ताकत लगाकर भी ईरान को हरा नहीं पाए, लेकिन पूरी दुनिया को मुश्किल में डाल दिया. अमेरिका में भी तेल की कीमतें बेइंतिहा बढ़ीं, इसलिए चुनाव में जो हुआ वो तो होना ही था. लेकिन क्या इस हार से ट्रंप बदल जाएंगे? इसकी कोई संभावना नहीं है.
वह तो अभी भी कह रहे हैं कि ballot पर अगर ट्रंप का नाम होता तो उनकी पार्टी की ज़बरदस्त जीत होती. ट्रंप ये भूल गए कि उन्होंने इन चुनावों में दिन रात कैम्पेन किया, अपने लिए वोट मांगे, पर अब वो हार की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं. ट्रंप नहीं बदलेंगे, ये तो तय है, पर हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और सीनेट में उनकी पार्टी का बहुमत न होने से वो हर मामले में मनमानी नहीं कर पाएंगे. ट्रंप के काम पर संसद की निगरानी बढ़ जाएगी क्योंकि अमेरिका में संसद के पास इसकी power है. ट्रंप के रियल एस्टेट कारोबार और उनके परिवार के सदस्यों की कमाई की जांच हो सकती है, ईरान के युद्ध पर हुए भारी खर्च पर सवाल पूछे जा सकते हैं लेकिन अमेरिका में राष्ट्रपति की बहुत सारी power कांग्रेस में बहुमत से ऊपर होती हैं. इसलिए वो executive order जारी करते रहेंगे.
ट्रंप के पास Veto power है, जो विदेश नीति और सैन्य कार्रवाई जैसे फैसले लेने का अधिकार देती है. ट्रंप के Veto को पलटने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव्स और सीनेट में दो-तिहाई बहुमत चाहिए. इसलिए ट्रंप का कोई ज्यादा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा. ट्रंप की जगह कोई और लीडर होता तो हार के बाद मनोबल खो कर बैठ जाता लेकिन ट्रंप कभी किसी speed breaker की परवाह नहीं करते, न ही वो अपनी गाड़ी की speed कम करते हैं. अब न उन्हें कोई अगला चुनाव लड़ना है और न किसी को सपोर्ट करना है. इसलिए ट्रंप न बदले हैं, न बदलेंगे.