सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहा दुर्लभ संयोग, भोलेनाथ के जलाभिषेक से बरसेगी कृपा!

आध्यात्मिक खबर। सावन का आखिरी सोमवार भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे पावन अवसर माना जाता है. इस वर्ष अंतिम सोमवार पर प्रीति योग, आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल का अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी संयोग बन रहा है।

तो आइए अब जानते हैं जलाभिषेक और पूजन के सभी मुहूर्त-

सावन का आखिरी सोमवार भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अत्यंत पावन अवसर माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत और पूजन करने से जीवन के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यदि आप भी इस खास दिन पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने जा रहे हैं, तो शुभ संयोग, सही मुहूर्त और पूजन विधि की पूरी जानकारी यहां देखें।

जलाभिषेक और पूजा का शुभ मुहूर्त (Sawan Somwar Jalabhishek & Puja Muhurat)

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 25 मिनट से 05 बजकर 10 मिनट तक

सुबह की पूजा का श्रेष्ठ समय- सुबह 6 बजे से 09 बजकर 15 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक

प्रदोष काल (संध्या पूजा)- शाम 06 बजकर 30 मिनट से रात 08 बजकर 30 मिनट तक

सावन  के आखिरी सोमवार पर शुभ संयोग (Sawan Last Somwar 2026 Shubh Sanyog)

सावन के अंतिम सोमवार पर प्रीति योग और आयुष्मान योग जैसे अत्यंत कल्याणकारी और दुर्लभ योग बन रहे हैं. इसके साथ ही, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल का दुर्लभ संयोग भी निर्मित होता है. इन शुभ योगों में की गई पूजा और जलाभिषेक का फल कई गुना बढ़कर मिलता है.

शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का सही तरीका

 तांबे या चांदी के पात्र में शुद्ध जल या गंगाजल लें और उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़े हों.
 सबसे पहले जलाधारी के बाएं भाग (श्री गणेश) और फिर दाएं भाग (भगवान कार्तिकेय) पर जल अर्पित करें.
– इसके बाद जलाधारी के मध्य भाग (माता अशोक सुंदरी) और फिर गोल भाग (माता पार्वती का हस्तकमल) पर जल चढ़ाएं.
– अंत में ऊं नमः शिवाय या श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप करते हुए शिवलिंग पर पतली धारा के साथ जल अर्पित करें.

सरल पूजन विधि

– प्रातः संकल्प: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में व्रत या पूजन का संकल्प लें.

 फिर, शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) अर्पित करने के बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं.

 उसके बाद भोलेनाथ को सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आंकड़े के फूल अर्पित करें.

 अंत में शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ करें. अंत में फल, मिठाई या खीर का भोग लगाकर धूप-दीप से आरती करें और अनजाने में हुई भूलचूक की क्षमा मांगें।

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