दुर्ग। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव माटरा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों के साथ खेत में कृषि कार्य में हाथ बंटाया। मंत्री यादव ने स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धान रोपाई से पूर्व खेत की मताई की और दो एकड़ भूमि को रोपाई के लिए तैयार कराया। इस दौरान उन्होंने खेत का निरीक्षण कर खाद की उपलब्धता के साथ साथ खेती की तैयारियों की जानकारी ली। किसानों को समय पर निंदाई-गुड़ाई सहित आवश्यक कृषि कार्य करने की सलाह दी। इसके पश्चात उन्होंने धान रोपाई की।
मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर पहुंच जाए, उसे अपनी माटी, संस्कृति और मूल कार्य से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं किसान परिवार से हूं। खेती-किसानी हमारे जीवन का आधार है। समय मिलने पर आज भी खेत में जाकर खेती के कार्यों में भाग लेता हूं।” उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
मंत्री बनने के बाद भी यादव अपनी खेती की स्वयं देखरेख करते हैं। हर साल वे कृषि कार्य करते है। उनका मानना है कि किसानों की मेहनत, चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझने के लिए खेत से निरंतर जुड़े रहना आवश्यक है। किसान परिवार से होने के कारण वे किसानों की समस्याओं एवं जरूरतों को बेहतर ढंग से समझते हैं।