रायपुर। कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोपी शोएब ढेबर को लेकर रायपुर में पुलिस और अदालत की कार्रवाई चर्चा में है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर शोएब ढेबर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, लेकिन अवकाशकालीन अदालत से उसे जमानत मिल गई। इसके बाद पुलिस ने दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति के लिए सीजेएम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब पुलिस उसकी तलाश में कई ठिकानों पर दबिश दे रही है।
मामले में पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और अन्य इनपुट के आधार पर शोएब ढेबर की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और रविवार को अवकाशकालीन कोर्ट में पेश किया। पुलिस की ओर से मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए पूछताछ और रिमांड की जरूरत बताई गई थी, लेकिन अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
इसके बाद पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति मांगी। रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने पुलिस की दलीलों और जांच के आधारों को देखते हुए शोएब ढेबर को फिर से गिरफ्तार करने की अनुमति दे दी।
कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस की दबिश
दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने शोएब ढेबर की तलाश तेज कर दी है। रायपुर में उसके संभावित ठिकानों पर पुलिस टीमों द्वारा दबिश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर छापेमारी की है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को विदेशी नंबर से धमकी भरे संदेश और व्हाट्सऐप कॉल किए गए थे। कथित तौर पर अमन साव और लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम लेकर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई और रकम नहीं देने पर परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया।
जांच में शोएब ढेबर का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। पुलिस की ओर से यह भी दावा किया गया कि मामले से जुड़े मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने पांच आईफोन भी जब्त किए हैं।
दीवार में छेद का भी जिक्र
मामले से जुड़ी जानकारी में कुकरेजा के घर की दीवार में करीब 12 से 18 इंच का छेद मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को धमकी और रंगदारी की साजिश से जोड़कर जांच कर रही है।
अदालत के फैसले को लेकर उठ रहे सवाल
शोएब ढेबर को गिरफ्तारी के बाद तत्काल जमानत मिलने और उसके बाद पुलिस द्वारा दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति मांगने की कार्रवाई ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। इसी वजह से पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और अदालत में रखे गए तथ्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, किसी अदालत द्वारा आरोपी को जमानत देना इस बात का अर्थ नहीं है कि धमकी या रंगदारी अपराध नहीं है। जमानत का आदेश मुकदमे के अंतिम दोषसिद्धि या निर्दोषता का फैसला नहीं होता। अदालत के आदेश में किन कानूनी आधारों पर जमानत दी गई, यह समझने के लिए संबंधित न्यायिक आदेश का अध्ययन जरूरी है।
वहीं, पुलिस ने बाद में सीजेएम कोर्ट से दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति हासिल कर ली है। अब जांच का अगला चरण यह तय करेगा कि कथित धमकी और रंगदारी की पूरी साजिश में किन लोगों की भूमिका थी और पुलिस के पास आरोपी के खिलाफ कौन-कौन से साक्ष्य हैं।
पुलिस की दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति के बाद शोएब ढेबर की तलाश जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि 25 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी मांगने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और विदेशी नंबरों तथा डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
फिलहाल इस मामले में अदालत का जमानत आदेश और बाद में दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति—दोनों अलग-अलग न्यायिक प्रक्रियाएं हैं। इसलिए पूरे मामले पर अंतिम निष्कर्ष जांच और आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही सामने आएगा।