गरियाबंद। जिले के कनसिंधी गांव से बैंकिंग प्रक्रिया और दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति की मृत्यु के महज छह दिन बाद ही उसके नाम से ग्रामीण बैंक में खाता खोल दिया गया। इतना ही नहीं, इस खाते में वित्तीय लेन-देन किए जाने की बात भी सामने आई है। मामले में मृतक की पत्नी शिव कुमारी वैष्णव ने 2 नवंबर 2026 को कुरा थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, शिकायत के बाद गांव में बैठक बुलाकर उन पर आवेदन वापस लेने का दबाव बनाए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
शिकायतकर्ता के आवेदन के मुताबिक, उनके पति नारद दास वैष्णव की मृत्यु 16 नवंबर 2023 को उनके घर पर हुई थी। लेकिन इसके ठीक छह दिन बाद यानी 22 नवंबर 2023 को ग्रामीण बैंक कनसिंधी में उनके नाम से बैंक खाता खोले जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर मृत्यु के बाद बैंक खाता किस आधार पर खोला गया? खाता खोलने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और उसमें किसके द्वारा लेन-देन किया गया? शिकायतकर्ता ने इन्हीं बिंदुओं की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत के बाद गांव में बैठक, आवेदन वापस लेने का दबाव?
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस में शिकायत दिए जाने के बाद गांव में बैठक बुलाई गई और उन पर आवेदन वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि बैंक खाता खोलने और लेन-देन की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार हुई है, तो जांच से आपत्ति क्यों होनी चाहिए? क्या शिकायतकर्ता को कानूनी कार्रवाई की मांग से पीछे हटाने की कोशिश की जा रही है? हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
कई लोगों की भूमिका की जांच की मांग
शिव कुमारी वैष्णव ने अपने आवेदन में मोनू दास वैष्णव, घनश्याम चंद्राकर, मधु चंद्राकर और पूर्व ग्राम पंचायत सचिव प्रवीण साहू सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा कुरा निवासी समद खाना की कथित भूमिका और इस प्रकरण से उनके संबंधों की भी पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता ने मृत्यु प्रमाण-पत्र में दर्ज तारीख और अन्य जानकारियों में विसंगतियां होने की आशंका भी जताई है। उन्होंने मांग की है कि मृत्यु प्रमाण-पत्र, बैंक खाता खोलने के आवेदन, केवाईसी दस्तावेज, पहचान संबंधी प्रमाण और खाते में हुए सभी लेन-देन का रिकॉर्ड खंगाला जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
विधवा पेंशन और बैंक बैलेंस चेक के नाम पर दस्तावेज लेने का आरोप
शिकायत में शिव कुमारी ने एक और महत्वपूर्ण आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बैंक बैलेंस चेक करने और विधवा पेंशन दिलाने के नाम पर उनसे कई बार बैंक से संबंधित दस्तावेज लिए गए। इस दौरान अंगूठे के निशान भी लिए जाने की बात कही गई है।
उन्होंने अपने आधार कार्ड से जुड़े बैंक खातों की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता को आशंका है कि उनके पति के नाम पर मृत्यु के बाद एलआईसी या अन्य बीमा पॉलिसी कराकर रकम निकालने का प्रयास भी किया गया हो सकता है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में 75 लाख रुपये का जिक्र होने का दावा
इस मामले में करीब 75 लाख रुपये का उल्लेख भी चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए दावा किया है कि बातचीत में लगभग 75 लाख रुपये की रकम का जिक्र सुनाई देता है। हालांकि, इस ऑडियो की प्रमाणिकता और उसमें कही गई बातों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता ने संबंधित बीमा पॉलिसियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि कहीं किसी दस्तावेज का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ तो नहीं लिया गया।
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नारद दास वैष्णव की मृत्यु 16 नवंबर 2023 को हो चुकी थी, तो 22 नवंबर को उनके नाम से बैंक खाता कैसे खोला गया? क्या खाता खोलने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था? खाते में हुए लेन-देन का लाभ किसे मिला? और शिकायत के बाद आवेदन वापस लेने के लिए दबाव बनाए जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है?
इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा। फिलहाल शिकायतकर्ता ने पुलिस से पूरे मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।