आज भूतकाल बन गई 5 दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या : अमित शाह

गोवा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नशीले पदार्थों पर नियंत्रण के मुद्दे पर गोवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार नशा-मुक्त भारत बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

अमित शाह ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, उस समय देश के सामने तीन बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां थीं। इनमें जम्मू-कश्मीर में बढ़ता आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में सक्रिय हथियारबंद समूह शामिल थे। सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार अभियान और रणनीतिक कदम उठाए।

गृहमंत्री ने कहा कि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि धारा 370 हटाए जाने के बाद अलगाववाद की भावना में कमी आई है और आतंकवाद से जुड़े आंकड़े लगातार घटे हैं। उनके मुताबिक जम्मू-कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और देश के अन्य हिस्सों के साथ वहां की दूरी कम करने के प्रयास सफल रहे हैं।

अमित शाह ने कहा कि करीब पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या अब भूतकाल बन चुकी है। उन्होंने कहा कि कभी तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर की कल्पना की जाती थी, लेकिन आज बड़ी संख्या में लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए आगे आ रहे हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में भी लगभग 10 हजार युवाओं ने हथियार छोड़े हैं। भारत सरकार ने विभिन्न समूहों के साथ 14 से अधिक समझौते किए हैं, जिसके बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र भी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अमित शाह ने कहा कि 2019 के बाद देश में अपराध करने के बाद विदेश भागने वाले भगोड़े अपराधियों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया और उन्हें भारतीय अदालतों के सामने लाने का काम किया गया है। गृहमंत्री ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ नशीले पदार्थों के खिलाफ भी सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है और केंद्र का लक्ष्य देश को नशे की समस्या से मुक्त करना है।

2014 के पहले टुकड़े-टुकड़े में ये लड़ाई लड़ी जाती थी। छोटी जब्ती, छोटे आरोपियों को पकड़कर संतुष्ट हो जाते थे। हमने 2019 से इस विषय को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्राथमिकता का विषय बनाया। नार्को के खिलाफ हमारी लड़ाई फाइलों और अलग अलग एजेंसियों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित और सतत अभियान बने। इसलिए हमने कार्यवाही की।

2004 से 2014 तक कांग्रेस के शासनकाल के दौरान जब्त ड्रग्स की मात्रा 26 लाख किलोग्राम थी। जबकि 2014 से 2026 के बीच 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से ज्यादा ड्रग्स पकड़ा गया है। इसका मूल्य कांग्रेस के शासन में 40 हजार करोड़ था और मोदी जी के नेतृत्व में अभियान चलाकर जो ड्रग पकड़ा गया, उसका मूल्य 1 लाख 89 हजार करोड़ रुपये है।

2026 से 2029 को हमने मिशन मोड़ अवधि के रूप में चिन्हित किया है। समय सीमाएं तय की हैं। अलग-अलग मंत्रालयों को उत्तरदायी बनाया गया है। मापनीय परिणाम के लक्ष्य तय किये गए हैं। तिमाही समीक्षा और परिणाम आधारित जवाबदेही भी हम तय करने जा रहे हैं।

इन 4 स्तंभों पर हमारा रोडमैप विजन डॉक्यूमेंट है। 1- Inteligence और operation आधारित enforcement. 2- Precurser aur Synthetic Drug पर नियंत्रण। 3- Demand और Harm Reduction. 4- समता निर्माण और समन्वय। मुझे विश्वास है कि 3 वर्ष के इस नशामुक्त भारत के अभियान में पूरे देश की जनता का हमें सहयोग मिलेगा।

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