एम्स रायपुर में ढाई साल की बच्ची का सफल कोक्लियर इम्प्लांट, खामोश दुनिया में गूंजी किलकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना और चिरायु योजना राज्य के जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इसमें जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटे-फटे होंठ, और टेढ़े-मेढ़े हाथ-पैर सहित 44 गंभीर बीमारियों का इलाज शामिल है। जरूरत पड़ने पर देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में भी इलाज कराया जाता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुँचाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता योजना के समन्वय से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की एक ढाई साल की मासूम बच्ची के जीवन में नया सवेरा आया है। जन्म से मूक-बधिर (सुनने में अक्षम) इस नन्हीं बालिका का एम्स रायपुर में सफल कोक्लियर इम्प्लांट (Cochlear Implant) ऑपरेशन किया गया, जिससे अब उसकी खामोश दुनिया में अपनों की आवाज गूंज सकेगी।

सरिया क्षेत्र के ग्राम लुकापारा-2 की आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत यह मासूम बच्ची जन्मजात श्रवण बाधिता (Congenital Hearing Loss) से ग्रसित थी। बच्ची के पिता नरेंद्र प्रधान खेती-किसानी के साथ मोबाइल रिपेयरिंग कर जैसे-तैसे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय होने के कारण लाखों रुपये के इस महंगे इलाज और ऑपरेशन का खर्च उठा पाना इस गरीब परिवार के लिए एक सपने जैसा था।

कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम (बरमकेला) ग्रामीण अंचलों में निरंतर स्वास्थ्य जांच शिविर चला रही है। इसी दौरान टीम की नजर इस बच्ची पर पड़ी। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद बच्ची को उच्च स्तरीय विशेषज्ञ परामर्श के लिए एम्स (AIIMS) रायपुर रेफर किया।

आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक और स्वास्थ्य विभाग के त्वरित प्रयासों से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए छह लाख रुपये की राशि तुरंत स्वीकृत की गई। इसके चलते पीड़ित परिवार पर इलाज का एक रुपये का भी आर्थिक बोझ नहीं आया। ​बीते 4 जुलाई 2026 को एम्स रायपुर के विशेषज्ञ सर्जनों की देखरेख में बच्ची का कोक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। डॉक्टरों के अनुसार, इस सर्जरी के बाद अब बच्ची में सुनने और समय के साथ सामान्य रूप से बोलने की क्षमता विकसित हो सकेगी। वह भी अब आम बच्चों की तरह स्कूल जाकर शिक्षा प्राप्त कर सकेगी और अपना भविष्य संवार सकेगी।

​यह सफलता चिरायु टीम बरमकेला की सजगता, समय पर बीमारी की पहचान और बेहतर समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे आंगनबाड़ियों और स्कूलों में आने वाली चिरायु टीमों से अपने बच्चों की नियमित जांच जरूर कराएं, ताकि किसी भी जन्मजात विकृति का समय रहते निःशुल्क और प्रभावी इलाज किया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *