दुर्ग। अवैध शराब परिवहन के एक मामले में पुलिस को न्यायालय में बड़ी सफलता मिली है। निचली अदालत से दोषमुक्त हुए दो आरोपियों के खिलाफ राज्य की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय, दुर्ग ने पूर्व में दिए गए दोषमुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत दोषी ठहराते हुए 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा और ममता धमगाये के खिलाफ अवैध शराब परिवहन के मामले में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस और संबंधित विभाग ने शराब, परिवहन में प्रयुक्त वाहन, शराब के नमूने, स्वतंत्र गवाहों के बयान और रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट सहित महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए थे।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने 31 जुलाई 2025 को दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य की ओर से आपराधिक अपील क्रमांक 05/2026 प्रस्तुत की गई।
अपील की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय, दुर्ग ने प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों, शराब की जप्ती, वाहन और नमूनों की जांच रिपोर्ट सहित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का विस्तृत परीक्षण किया। इसके बाद न्यायालय ने 23 अक्टूबर 2026 को निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को निरस्त करते हुए दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध घोषित कर दिया।
न्यायालय ने आरोपी लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा और ममता धमगाये को 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को 6-6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने पहले जेल में बिताई गई अवधि का लाभ नियमानुसार देने तथा प्रकरण में प्रयुक्त वाहन को राजसात करने की कार्यवाही जारी रखने के निर्देश भी दिए हैं।
महाराष्ट्र के रहने वाले हैं दोनों आरोपी
दोषसिद्ध आरोपी लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा (38 वर्ष) निवासी बेडगांव, जिला गढ़चिरौली और ममता धमगाये (47 वर्ष) निवासी कोरची, जिला गढ़चिरौली, महाराष्ट्र हैं। मामले में शराब परिवहन के लिए इस्तेमाल किया गया वाहन क्रमांक CG-08-AU-0756 भी जब्त किया गया था।
इस प्रकरण की विवेचना एवं साक्ष्य संकलन में उपनिरीक्षक पारस सिंह ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं शराब के नमूनों के वैज्ञानिक एवं रासायनिक परीक्षण में आबकारी विभाग का सहयोग रहा। राज्य की ओर से न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई।