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मृत्युदंड : फांसी की सजा सुनाई दुर्ग कोर्ट ने, दरिंदे ने 6 साल की बच्ची से रेप फिर किया था मर्डर

दुर्ग। जिले में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के बेहद गंभीर मामले में विशेष POCSO न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव (24) को दोषसिद्ध करते हुए दो प्रमुख धाराओं में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। साथ ही एक अन्य धारा में उसे 5 वर्ष के सश्रम कारावास से भी दंडित किया गया है। यह मामला थाना मोहन नगर के अपराध क्रमांक 133/2025 से संबंधित है। घटना के बाद दुर्ग पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए बच्ची की तलाश शुरू की थी। पुलिस के अनुसार, तलाश के दौरान बालिका को एक वाहन से बरामद किया गया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

6 अप्रैल 2025 को बच्ची के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही मोहन नगर पुलिस ने संभावित स्थानों पर तलाश शुरू कर दी। तकनीकी और मैदानी सूचनाओं के आधार पर पुलिस टीमों ने खोजबीन की और बालिका को बरामद किया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर साक्ष्यों को जुटाया और मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की। दुर्ग पुलिस ने जांच के दौरान चिकित्सकीय, जैविक, DNA, परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित किया। घटनास्थल एवं आसपास के CCTV फुटेज और DVR भी जब्त किए गए। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के कपड़ों तथा घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया। DNA सैंपल समेत अन्य रिपोर्टों को चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया गया।

विशेष दाण्डिक प्रकरण (POCSO) क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ FTSC, विशेष न्यायालय (POCSO), दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव को POCSO अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड तथा प्रत्येक धारा में ₹5,000 अर्थदंड से दंडित किया। वहीं BNS की धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹1,000 अर्थदंड लगाया गया है। न्यायालय ने मामले को ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का माना है। मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया नियमानुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के समक्ष होगी।

पीड़ित परिवार को ₹7 लाख क्षतिपूर्ति का निर्देश

न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के तहत ₹7 लाख की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया है। मामले की त्वरित जांच के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर के नेतृत्व में थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा और विवेचना टीम ने जांच की। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने, वैज्ञानिक परीक्षण, DNA जांच और न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने में पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने पैरवी की।

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