कुरूद में PMFME कार्यशाला का आयोजन: स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और डिजिटल मार्केटिंग से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

धमतरी/ कुरुद। ग्रामीण अंचल के पारंपरिक कृषि उत्पादों को आधुनिक कारोबार से जोड़कर किसानों, महिलाओं और स्थानीय उद्यमियों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से जनपद पंचायत कुरूद में ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना’ (PMFME) के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग 40 किसान, ग्रामीण महिलाएं, महिला स्व-सहायता समूह, ओजस्वी एफपीओ के सदस्य और नवोदित उद्यमी शामिल हुए।

कार्यशाला की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही 5 इच्छुक हितग्राहियों के ऑनलाइन आवेदन दर्ज किए गए, ताकि उन्हें तत्काल योजना का लाभ मिल सके। कार्यक्रम के दौरान जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की प्रबंधक प्रचेता किरण छिदेहा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए शासन की विभिन्न उद्यमिता योजनाओं और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर विस्तृत प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि किस तरह स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली फसलों में थोड़ा बदलाव और प्रसंस्करण कर उन्हें बड़े बाजार के लिए लाभकारी उत्पाद बनाया जा सकता है। उन्होंने योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता, ऋण प्रक्रिया, शासकीय अनुदान और तकनीकी प्रशिक्षण की बारीकियों से उद्यमियों को अवगत कराया और उन्हें निर्भीक होकर नए उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया। तकनीकी सत्र में डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन (DRP) डॉ. संदीप मेश्राम ने व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए कृषि उत्पादों की वैल्यू एडिशन की अपार संभावनाओं को सामने रखा।

उन्होंने बताया कि मोरिंगा की पत्तियों से पाउडर, टैबलेट व चटनी, शहतूत से जूस व जैम, टमाटर से सूप पाउडर तथा मशरूम से पास्ता, नूडल्स और प्रोटीन पाउडर जैसे दैनिक उपयोग के उत्पाद तैयार कर छोटे स्तर पर भी बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके अलावा परंपरागत पापड़ निर्माण और अन्य मूल्यवर्धित खाद्य पदार्थों के व्यावसायिक उत्पादन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डिजिटल युग की जरूरतों को रेखांकित करते हुए डॉ. मेश्राम ने कृषकों और महिला समूहों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा डिजिटल मार्केटिंग के गुर सिखाए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक दौर में सिर्फ उत्पाद बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि सही ब्रांडिंग और ऑनलाइन उपस्थिति से ही छोटे उद्यमी बड़े बाजारों में अपनी पैठ बना सकते हैं। प्रतिभागियों को अपने सामान को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लिस्ट करने, सोशल मीडिया अभियानों, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांड नेम चयन और AI टूल्स के जरिए बिक्री बढ़ाने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। जिला पंचायत, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग और बिहान योजना के समन्वय से आयोजित इस कार्यशाला में ओजस्वी FPO और स्थानीय उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी रही।

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