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रायपुर आश्रम में धनतेरस पर जरूरतमंदों को बांटी गई दीपावली की खुशियां

रायपुर। श्री योग वेदांत सेवा समिति एवं संत आशाराम आश्रम की ओर से धनतेरस के अवसर पर रायपुर के लवकुश वाटिका स्थित आश्रम में दरिद्र नारायण सेवा एवं भंडारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं, संत आशाराम के स्वास्थ्य को लेकर जोधपुर में जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आरोग्यम् हॉस्पिटल में उपचार की व्यवस्था करने की मांग की गई है।

आश्रम परिसर में आयोजित सेवा कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू हुआ। इसका आयोजन रायपुर समिति, महिला उत्थान मंडल और युवा सेवा संघ के संयुक्त सहयोग से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरु-वंदना, सामूहिक मंत्र जाप और हरि ॐ के उद्घोष के साथ हुई। इसके बाद साधकों ने जरूरतमंदों का तिलक और पुष्पों से स्वागत किया तथा उन्हें जीवनोपयोगी सामग्री वितरित की।

इस दौरान जरूरतमंद परिवारों को बाल्टी, चटाई, मिठाई, दीये, रुई-बत्ती, लाई-बताशा, पूज्य बापूजी का लॉकेट, आश्रम का नववर्ष कैलेंडर, स्टील की थाली, साड़ी, तेल, गमछा, अरहर दाल, नमक, आटा और ऋषि प्रसाद का दीपावली विशेषांक दिया गया। इसके साथ ही नगद धनराशि भी प्रदान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के लिए भंडारा प्रसाद की व्यवस्था की गई थी।

आयोजन में बड़ी संख्या में साधक, मातृशक्ति, युवा सेवा संघ के कार्यकर्ता और स्थानीय श्रद्धालु शामिल हुए। समिति के अनुसार, लाभार्थियों ने इस सेवा के लिए आश्रम परिवार के प्रति आभार जताया। आश्रम की ओर से संदेश दिया गया कि दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां और उम्मीद का प्रकाश पहुंचाना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

दूसरी ओर, संत आशाराम बापू के स्वास्थ्य को लेकर जोधपुर केंद्रीय कारागार प्रशासन और राजस्थान सरकार के संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में 87 वर्षीय आशाराम को उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए आरोग्यम् हॉस्पिटल, जोधपुर में उपचार की अनुमति देने और आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

समिति की ओर से जारी पत्र में दावा किया गया है कि आशाराम हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हाइपोथायरॉइड और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। पत्र के अनुसार, पैरोल के दौरान 13 अक्टूबर 2026 को उन्हें गंभीर हृदयाघात हुआ था, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। इसके बाद 20 अक्टूबर को एट्रियल फिब्रिलेशन और 22 अक्टूबर को पोस्ट-एमआई एंजाइना की समस्या सामने आने का भी उल्लेख किया गया है।

ज्ञापन में इंदौर के कार्डियोलॉजिस्ट की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए विशेष सावधानी और लगातार चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता बताई गई है। इसके बाद उन्हें एयर एम्बुलेंस से जोधपुर लाए जाने की जानकारी भी दी गई है।

ज्ञापन के अनुसार, वर्ष 2024 से उनका उपचार कर रहे आरोग्यम् हॉस्पिटल के डॉ. अरुण त्यागी ने 28 अक्टूबर 2026 को उपचार योजना देते हुए अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज जारी रखने की आवश्यकता बताई थी। पत्र में यह भी कहा गया है कि डॉक्टर ने जेल में मुलाकात के दौरान जेल अधीक्षक को लिखित रूप से स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताते हुए आरोग्यम् हॉस्पिटल में स्थानांतरित करने की सलाह दी थी।

समिति ने अपनी मांग के समर्थन में राजस्थान उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों का हवाला दिया है। ज्ञापन में 4 जून और 1 जुलाई 2026 के राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों तथा 30 जून और 6 अगस्त 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं जारी रखने और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता उपलब्ध कराने संबंधी निर्देश दिए गए थे।

ज्ञापन में जेल प्रशासन की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। समिति का कहना है कि 2 जून को जेल प्रशासन ने ही आशाराम की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप जेल औषधालय में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए उन्हें आरोग्यम् हॉस्पिटल भेजा था।

पत्र में यह भी दावा किया गया है कि एम्स के मेडिकल बोर्ड ने उन्हें हाई रिस्क मरीज बताया है और उनकी उम्र व स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं माना है। इसके अलावा, परिजनों की ओर से गर्म पानी, बैठने के लिए कुर्सी और दैनिक कार्यों में सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि न्यायालयीन आदेशों और डॉक्टर की उपचार योजना के अनुसार आरोग्यम् हॉस्पिटल में उपचार की अनुमति दी जाए। यदि तत्काल अस्पताल में स्थानांतरित करना संभव नहीं है, तो इसके कारण लिखित रूप में बताए जाएं और तब तक हृदय रोग विशेषज्ञ की चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही किसी भी आपातकालीन स्थिति में, विशेषकर रात के समय, उन्हें एम्स जोधपुर या आरोग्यम् हॉस्पिटल पहुंचाने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। जेल में नियमित हृदय निगरानी, आपातकालीन दवाइयां, जीवनरक्षक उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी और दैनिक जरूरतों के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।

समिति ने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा है कि यह किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं, बल्कि न्यायालयीन आदेशों के पालन और गंभीर रूप से बीमार वृद्ध व्यक्ति को आवश्यक चिकित्सा तथा मानवीय गरिमा के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने का विषय है।

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