धमतरी। असम के दरांग जिला परिषद की अध्यक्ष सेवाली गोस्वामी कलिता ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गंगरेल बांध का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने बांध की विशाल जलराशि, भव्य संरचना और आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखा। गंगरेल की मनमोहक खूबसूरती से प्रभावित सेवाली गोस्वामी कलिता ने इसकी जमकर सराहना की।
इस अवसर पर बीजेपी नेता खूबलाल ध्रुव भी उनके साथ मौजूद रहे। उन्होंने सेवाली गोस्वामी कलिता को गंगरेल बांध की उपयोगिता, सिंचाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, विद्युत उत्पादन और पर्यटन की दृष्टि से इसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी।
गंगरेल बांध छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि कृषि, पेयजल, उद्योग, बिजली और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र है। बांध के पानी से लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है, जिससे धमतरी सहित आसपास के जिलों के किसानों को बड़ी राहत मिलती है।
इसके साथ ही रायपुर, नवा रायपुर और धमतरी जैसे प्रमुख शहरों की पेयजल जरूरतों में भी गंगरेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों में शामिल भिलाई स्टील प्लांट (BSP) को भी बांध से औद्योगिक एवं अन्य उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है।
गंगरेल बांध में 10 मेगावाट क्षमता का जलविद्युत संयंत्र भी स्थापित है। वहीं प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है। यहां बोटिंग, वाटर स्पोर्ट्स और क्रूज जैसी सुविधाएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। यही वजह है कि गंगरेल को लोग प्यार से “छत्तीसगढ़ का मिनी गोवा” भी कहते हैं।
गंगरेल के तट पर स्थित मां अंगारमोती मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
असम की जिला परिषद अध्यक्ष का गंगरेल भ्रमण छत्तीसगढ़ और असम के बीच बढ़ती आत्मीयता, सांस्कृतिक जुड़ाव और आपसी संबंधों का खूबसूरत संदेश भी देता नजर आया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और पर्यटन स्थलों की विशेषताओं से उन्हें रूबरू कराया गया।
