दिल्ली में PM मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम मुलाकात, द्विपक्षीय बातचीत शुरू

नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा पत्र पर सर्वसम्मति से सहमति बन चुकी है। इस समिट की शुरुआत से पहले ही भारत को एक बड़ी कूटनीतिक जीत मिल गई थी। सुबह 4 बजे तक चली बातचीत के बाद आखिरकार ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति बन गई थी। अब इस समिट के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच में द्विपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है।

गलवान में हुई झड़प के बाद दोनों नेता पहली बार भारत में मिल रहे हैं। इससे पहले भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाली इस बैठक में BRICS के 11 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब से कुछ देर पहले भारत पहुंच गए हैं।

इस समिट पर दुनिया की नजर इसलिए भी है क्योंकि यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, वैश्विक व्यापार तनाव और बदलती विश्व व्यवस्था के बीच BRICS की भूमिका पर अहम चर्चा होनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित मुलाकात भी इस सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल होगी, जो आज शाम करीब 6 बजे होगी। ब्रिक्स से जुड़े सभी लाइव अपडेट्स के लिए आप बने रहें लाइव हिन्दुस्तान के साथ।

पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच में द्विपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है। दोनों नेताओं के बीच में गलवान में हुई झड़प के बाद भारत में यह पहली बैठक होगी। 7 साल पहले चीनी राष्ट्रपति भारत आए थे।

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स नेताओं ने उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधार का आह्वान किया है।

समूह ने एकतरफा शुल्क, व्यापार प्रतिबंधों और आर्थिक प्रतिबंधों की भी कड़ी आलोचना की। नई दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स ने कहा कि बढ़ता संरक्षणवाद और एकतरफा व्यापार उपाय वैश्विक व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं के लिए खतरा हैं।

समूह ने कहा, ”हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।”

18वें BRICS शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा पत्र पर सर्वसम्मति से सहमति बन चुकी है। इस समिट की शुरुआत से पहले ही भारत को एक बड़ी कूटनीतिक जीत मिल गई थी। सुबह 4 बजे तक चली बातचीत के बाद आखिरकार ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति बन गई थी। अब इस समिट के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच में द्विपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है। गलवान में हुई झड़प के बाद दोनों नेता पहली बार भारत में मिल रहे हैं।

इससे पहले भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाली इस बैठक में BRICS के 11 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब से कुछ देर पहले भारत पहुंच गए हैं।

इस समिट पर दुनिया की नजर इसलिए भी है क्योंकि यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, वैश्विक व्यापार तनाव और बदलती विश्व व्यवस्था के बीच BRICS की भूमिका पर अहम चर्चा होनी है। प्रधानमंत्री मोदी की शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित मुलाकात भी इस सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल होगी, जो आज शाम करीब 6 बजे होगी। ब्रिक्स से जुड़े सभी लाइव अपडेट्स के लिए आप बने रहें लाइव हिन्दुस्तान के साथ।

पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच में द्विपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है। दोनों नेताओं के बीच में गलवान में हुई झड़प के बाद भारत में यह पहली बैठक होगी। 7 साल पहले चीनी राष्ट्रपति भारत आए थे।

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स नेताओं ने उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधार का आह्वान किया है।

समूह ने एकतरफा शुल्क, व्यापार प्रतिबंधों और आर्थिक प्रतिबंधों की भी कड़ी आलोचना की। नई दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स ने कहा कि बढ़ता संरक्षणवाद और एकतरफा व्यापार उपाय वैश्विक व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं के लिए खतरा हैं।

समूह ने कहा, ”हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।”

ब्रिक्स समूह ने चेतावनी दी कि व्यापार प्रतिबंधात्मक उपायों से वैश्विक व्यापार में और कमी आ सकती है, आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो सकती हैं तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापार गतिविधियों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की उस तस्वीर ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं और उनकी दाईं तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बाईं तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खड़े थे और उन्होंने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा हुआ था।

प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम खाते पर भारत मंडपम की वह तस्वीर पोस्ट की गई, जहां ब्रिक्स नेताओं ने शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस तस्वीर की पृष्ठभूमि में ‘किंगडम बीजीएम’ नाम का गाना बज रहा था।अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के कड़े प्रोटोकॉल के बीच, गर्मजोशी भरा वह पल खास तौर पर उभरकर सामने आया।

मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर कुछ और तस्वीरें भी पोस्ट कीं, जिनमें से एक तस्वीर में प्रधानमंत्री, पुतिन, शी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को कार्यक्रम स्थल के अंदर एक साथ चलते हुए दिखाया गया है।

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया है। भारत और ब्राजील लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी कर रहे हैं। चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में भारत और ब्राजील की इस आकांक्षा के लिए अपना समर्थन दोहराया है।

शनिवार को यहां भारत की मेजबानी और अध्यक्षता में आयोजित दो दिन के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाये गए दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन करते हुए सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की बात कही।

वर्ष 2022 की बीजिंग और 2023 की जोहान्सबर्ग-II नेताओं की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए चीन और रूस ने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में, भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं के लिए अपना समर्थन दोहराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि ब्रिक्स देश साझा बयान जारी करने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 सर्वसम्मति से पारित हो गया है।:

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