रायपुर। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय द्वारा रूरल टेक्नोलॉजी विभाग में कु. सुरभि पांडेय को डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने अपना शोध कार्य डॉ. भास्कर चौरसिया के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया। उनके शोध का विषय स्टडीस आन आइसोलेशन एंड आइडेन्टीफिकेशन ऑफ एंडोफिटिक फंगई एंड देयर बायोएक्टिव मालीक्यूल्स फाम कर्कुमा कैसिया रोबेक्स था। यह शोध पादप कवक और उनके बायोएक्टिव अणुओं के अलग ही पहचान पर केंद्रित था, जो ग्रामीण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है।
जांजगीर (छत्तीसगढ़) निवासी सुरभि पाण्डेय ने अपना प्रजेन्टेशन देते समय बताया कि कर्कुमा कैसीया (काली हल्दी) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से किया जाता रहा है। प्रस्तुत शोध का उद्देश्य कर्कुमा कैसीया के पत्तों एवं प्रकंद (राइजोम) से एंडोफाइटिक कवकों का पृथक्करण, उनकी पहचान तथा उनके द्वारा उत्पादित जैवसक्रिय अणुओं का अध्ययन करना था। अध्ययन में कुल 22 एंडोफाइटिक कवकीय आइसोलेट प्राप्त किए गए, जिनकी पहचान आकृतिक (Morphological) एवं MALDI-TOF विश्लेषण के आधार पर की गई। चयनित कवकों में एंजाइम उत्पादन तथा प्रतिजैविक (Antimicrobial) क्षमता का मूल्यांकन किया गया। पौधे एवं कवकीय अर्कों का GC-MS विश्लेषण कर विभिन्न जैवसक्रिय यौगिकों की पहचान की गई। इन यौगिकों की संभावित औषधीय उपयोगिता का आकलन HER2 प्रोटीन के विरुद्ध मॉलिक्यूलर डॉकिंग द्वारा किया गया, जिसमें कुछ यौगिकों ने संतोषजनक बाइंडिंग क्षमता प्रदर्शित की। यह अध्ययन दर्शाता है कि कर्कुमा कैसीया तथा उसके एंडोफाइटिक कवक जैवसक्रिय यौगिकों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जिनका भविष्य में नई प्रतिजैविक एवं कैंसररोधी औषधियों के विकास तथा जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) में उपयोग किया जा सकता है।
सुरभि की माता पुष्पा पाण्डेय शिक्षक और पिता विजय पाण्डेय हैं। उन्होंने अपनी बेटी की मेहनत में हमेशा सहयोग किया है। सुरभि के प्रजेन्टेशन से पीएच.डी. की एक्सटर्नल लेने आने प्राध्यापक बहुत ही प्रभावित हुए। उन्होंने सुरभि का बधाई दी कि भविष्य में इसका उपयोग लाभकारी होगा। सुरभि ने बताया कि पादप कवक और उनके बायोएक्टिव अणु चिकित्सा, कृषि और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी अनूठी संरचना, विभिन्न औषधीय गुणों और मेटाबोलाइट विविधता के कारण विशेष पहचान रखते हैं। एंडोफाइटिक कवक पौधों के ऊतकों के अंदर बिना कोई नुकसान पहुँचाए निवास करते हैं। ये कवक अल्कलॉइडए टेरपेनोइड्स और फिनोलिक यौगिक जैसे महत्वपूर्ण बायोएक्टिव मॉलिक्यूल्स के प्रमुख स्रोत हैं, जिनका उपयोग कैंसर, संक्रमण और विभिन्न रोगों के उपचार के लिए नई औषधियाँ विकसित करने में किया जाता है।