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जंगल के रास्ते और पिकअप में हो रही थी गौवंश तस्करी, जशपुर पुलिस ने 7 आरोपियों को दबोचा

जशपुर। जिले में गौवंश तस्करी और पशुओं के साथ क्रूरता के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन शंखनाद’ के तहत जशपुर पुलिस ने दो अलग-अलग स्थानों पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने 13 गौवंशों को तस्करों के कब्जे से मुक्त कराया है। वहीं इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। कुनकुरी पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही पिकअप वाहन को भी जब्त किया है।

पुलिस के अनुसार, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई।

पहली कार्रवाई थाना सिटी कोतवाली जशपुर क्षेत्र में हुई। 2 नवंबर की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग दमेंरा जंगल के रास्ते जकबा होते हुए गौवंशों को पैदल हांककर झारखंड की ओर ले जा रहे हैं।

सूचना पर पुलिस टीम ने जकबा जंगल के पास घेराबंदी की। इस दौरान दो व्यक्ति 9 गौवंशों को पैदल ले जाते मिले। पुलिस को देखकर दोनों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने एक आरोपी यूसुफ अंसारी (48 वर्ष) को पकड़ लिया, जबकि दूसरा फरार हो गया।

पूछताछ में गौवंश तस्करी में शामिल तीन अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने कुरैशी (32 वर्ष), मो. एजाज अंसारी (36 वर्ष) और हेमंत यादव (37 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

दूसरी कार्रवाई थाना कुनकुरी क्षेत्र में की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि पिकअप वाहन क्रमांक JH-01-CG-8166 में गौवंशों को भरकर पत्थलगांव-कुनकुरी मार्ग से जशपुर की ओर ले जाया जा रहा है।

पुलिस ने लोयोला स्कूल के सामने नेशनल हाईवे पर घेराबंदी कर संदिग्ध पिकअप को रोक लिया। तलाशी के दौरान वाहन में 4 गौवंश मिले। वाहन में सवार आमोद राम (24 वर्ष), मंगरा राम (45 वर्ष) और अल्फोना कुजूर (42 वर्ष) से परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर गौवंशों को मुक्त कराया और तस्करी में इस्तेमाल पिकअप वाहन को जब्त कर लिया।

दोनों मामलों में इन धाराओं के तहत कार्रवाई

पुलिस ने दोनों मामलों में छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(1)(क)(घ) के तहत अपराध दर्ज किया है।

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